जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में किशोरी को डरा-धमका कर दो साल तक दुराचार करने वाले सौतेले पिता को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार शहर की एक किशोरी ने 8 अगस्त 2014 को पिथौरागढ़ थाने में अपने सौतेला पिता के खिलाफ दो साल तक शारीरिक शोषण करने की रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना में सामने आया कि सौतेला पिता वर्ष 2012 से उसके साथ दुराचार कर रहा था। वर्ष 2014 में कक्षा सात में पढ़ने वाली इस बच्ची के पेट में एक दिन स्कूल में दर्द हुआ तो उसने स्कूल की प्रधानाचार्य को सौतेले पिता की करतूत बताई। स्कूल ने सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमा बम को मामले की जानकारी दी और उन्हें पीड़िता से मिलवाया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी ने मामले के परीक्षण में आरोपों को सही पाया। मंगलवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376 (2) पाक्सो अधिनियम के तहत 10 साल के सश्रम कारावास के साथ ही 5000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) चंद्र बल्लभ उप्रेती ने पैरवी की।