चार बेटियां होने के कारण अपनी बीवी का उत्पीड़न करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने वाले एक अभियुक्त को जिला एवं सत्र न्यायालय ने बुधवार को धारा 306 में दोषी पाते हुए छह साल के सश्रम कारावास, दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। इसके अलावा धारा 498 में तीन साल की सजा, पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता गंगा सिंह बाफिला ने बताया कि बेड़ीनाग थाने के अंतर्गत बोराआगर गांव निवासी शंकर राम का विवाह 2002 में नीमा देवी के साथ हुआ। नीमा देवी की लगातार चार बेटियां हुई और एक बेटा हुआ। चार बेटियां होने पर शंकर राम अपनी बीवी का उत्पीड़न करता था और शराब पीकर मारपीट करता था। इस उत्पीड़न से तंग आकर नीमा देवी ने 17 अप्रैल 2014 को अपने घर के पास एक पेड़ में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। गांव के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया।18 अप्रैल 2014 को मृतका नीमा देवी के पिता बागेश्वर जिले के थाना कांडा अंतर्गत भैंस्यूड़ी गांव निवासी दीवान राम ने अपने दामाद शंकर राम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में उन्होंने उल्लेख किया कि शंकर राम बेटियां होने के कारण लगातार नीमा का उत्पीड़न करता था। इसी से विवश होकर नीमा ने आत्महत्या की। पुलिस ने धारा 306 और 498 में मुकदमा दर्ज किया। यह मामला अदालत में चल रहा था। अभियोजन पक्ष की ओर से मृतका के पिता, माता, चाचा, मामा, जांच अधिकारी और पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर को गवाह के तौर पर अदालत में पेश किया। बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी ने शंकर राम को सजा सुना दी।