सिनलेख गांव में विवाह का फर्नीचर छोड़कर लौट रहा पिकप वाहन असंतुलित होकर खाई में जा गिरा। हादसे में चालक समेत दो लोग घायल हो गए। एक घायल को जिला अस्पताल भेजा गया है। वहीं, घायलों के लिए 108 वाहन नहीं मिला। समाजसेवी राम सिंह बिष्ट गंगोलीहाट से अपना वाहन लेकर 40 किमी दूर घटनास्थल पहुंचे और घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाए।
पतारबाड़ा गंगोलीहाट निवासी भगवत राम (33) पुत्र बसंत राम बुधवार शाम पिकप वाहन (यूके 04 सीए 0243) से चहज से बारात का फर्नीचर लेकर सिनलेख गया था। सिनलेख में सामान उतारने के बाद वह वाहन से लौट रहा था कि चहज से चार किमी पहले खैल्याड़ी बैंड में करीब सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरा। वाहन में भगवत के साथ उसी के गांव का रवि कुमार (32) पुत्र मोहन राम भी था। हादसे में दोनों घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने 108 को फोन किया।
वहां से जवाब मिला कि बेड़ीनाग से 108 वाहन आएगा। घटनास्थल गंगोलीहाट से करीब 40 किमी दूर था, जबकि गंगोलीहाट से बेड़ीनाग की दूरी 25 किमी है। बेड़ीनाग से 108 वाहन आने की बात सुनकर स्थानीय लोग सकते में आ गए। इसके बाद पिकप स्वामी तुला सिंह ने समाजसेवी राजकीय ठेकेदार राम सिंह बिष्ट को फोन किया। बिष्ट घायलों को गंगोलीहाट अस्पताल लाए।
डॉ. शंकर दत्त सूंठा ने घायलों का प्राथमिक इलाज किया। भगवत को अंदरूनी चोट होने के कारण उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। वहीं, 108 सेवा के प्रति लोगों में गुस्सा है। लोगों का कहना है कि बिष्ट मदद के लिए आगे न आते तो घायलों की जान के लिए खतरा हो सकता था।
सीएम से की 108 सेवा में सुधार की मांग
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगोलीहाट में तैनात 108 एंबुलेंस का लाभ क्षेत्र की जनता को नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र प्रमुख ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपातकालीन सेवा में सुधार करने की मांग की है।
क्षेत्र प्रमुख गंगा बिष्ट ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि गंगोलीहाट सीएचसी में तैनात 108 आपातकालीन सेवा का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि 28 नवंबर की रात हुई वाहन दुर्घटना के घायलों को जब अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नंबर पर फोन किया गया तो उन्हें वाहन खराब होने और पिथौरागढ़ संपर्क करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि यह वाहन कई महीनों से खराब पड़ा था। इससे लंबे समय तक यहां के मरीजों और गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए प्राइवेट वाहनों को बुक कराकर जिला अस्पताल जाना पड़ा। वाहन में सुधार के बाद भी लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि 108 वाहन नहीं मिलने पर मरीजों की जान को खतरा रहता है।