बेड़ीनाग तहसील के राईगड़साड़ी गांव में खनन को लेकर 13 दिसंबर 2015 को हुए बवाल में अब खनन कारोबारी ने ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। खनन कारोबारी के प्रतिनिधि दिल्ली के मधुवन इनक्लेव निवासी मुकेश पांडेय ने गंगोलीहाट की सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में इस आशय का प्रार्थनापत्र दिया कि राईगड़साड़ी गांव के लोगों ने उनके वैध खनन को रोका। प्रार्थनापत्र में यह भी उल्लेख किया है कि गांव के लोगों ने उनके कर्मचारियों को डराया-धमकाया और गांव में खनन करने पर भयानक नतीजे भुगतने की धमकी दी।
ग्रामीणों की ओर से खनन कारोबारियों के 70 लोगों के खिलाफ पिछले साल 14 दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया गया और सभी को गिरफ्तार कर अल्मोड़ा जेल भेज दिया गया। हालांकि सभी लोग कुछ दिनों बाद निजी मुचलकों पर छूट गए थे। खनन कारोबारी ने अदालत को दिए गए पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि बेड़ीनाग थाना पुलिस ने उनकी रिपोर्ट पर कोई गौर नहीं किया और पुलिस ग्रामीणों के साथ मिल गई थी। पुलिस से इंसाफ नहीं मिलने पर उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी। थाना प्रभारी एसएस नयाल ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मुकदमा नामजद नहीं है।
बताया गया कि राईगड़साड़ी गांव में खनन का ग्रामीण विरोध कर रहे थे। आरोप है कि इस विरोध को दबाने के लिए दिल्ली निवासी खनन कारोबारी मनीष यादव 13 दिसंबर 2015 को अपने कई साथियों के साथ गांव के लोगों को डराने-धमकाने के लिए पहुंच गया। ग्राम प्रधान पूरन राम ने इस मामले में मनीष यादव सहित 70 लोगों के खिलाफ धारा 151, 107, 116, 147, 148, 149, 504, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया, जिसकी विवेचना थाना प्रभारी एसएस नयाल ने की और इन सभी आरोपियों को पुलिस ने अगले दिन गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेशबंदी से पहले खनन कारोबारी के प्रतिनिधि मुकेश पांडेय की ओर से यह प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिस पर कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मंगलवार को ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसओ ने बताया कि इस मामले की विवेचना की जा रही है।