जिला एवं सत्र न्यायालय ने दहेज हत्या के आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा आरोपी को हत्या के बाद साक्ष्य छुपाने और महिला उत्पीड़न के मामले में भी सजा हुई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
शासकीय अधिवक्ता गंगा सिंह बाफिला ने बताया कि गंगोलीहाट के चमडुंगरा गांव के कुंडल गिरी की पत्नी सीता देवी 3/4 फरवरी 2013 को घर से अचानक गायब हो गई थी। उसकी लाश 25 दिन बाद 28 फरवरी 2013 को कुंडल सिंह के घर के पास खेत से बरामद हुई। कुंडल गिरी ने पत्नी की हत्या कर लाश को खेत में दफना दिया था और उसके ऊपर झाड़ियां रख दी थी। सीता देवी के पिता चंपावत जिले के तामली निवासी गणेश नाथ ने अपने दामाद के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही यह भी आरोप लगाया था कि वह बेटी को दहेज के लिए लगातार परेशान करता था। इस मामले की विवेचना पुलिस क्षेत्राधिकारी एसके सिंह और राजीव मोहन के साथ साथ गंगोलीहाट चौकी पुलिस ने की। अदालत ने कई गवाहों को पेश किया।
शुक्रवार को विद्वान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सिकंद कुमार त्यागी ने कुंडल गिरी को धारा 304 बी (दहेज हत्या) में आजीवन कारावास, धारा 201 (साक्ष्य छुपाने) में एक वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड, 498 ए (महिला उत्पीड़न) में तीन वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुना दी। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त सजा भोगनी होगी। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि अर्थदंड की राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मृतका की दोनों बेटियों को बराबर बांटा जाएगा।