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Pithoragarh News: तरक्की की राह में भ्रष्टाचार सबसे बड़ा रोड़ा

Thu, 10 Aug 2023 10:55 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। आजादी का दौर भी क्या दौर था। अब तो साहब सब कुछ बदल गया है। भ्रष्टाचार आपको हर जगह मिल जाएगा। अगर अधिकारी, कर्मी ईमानदारी से काम करते तो देश का विकास तेजी से होता। तब लोग ईमानदार भी हुआ करता थे। आज के दौर में ईमानदारी बेहद कम देखने को मिलती है। देश की इतनी बड़ी आबादी में चंद ही लोग ईमानदारी से काम करते हैं। आजादी को करीब से देखने वाले बुजुर्ग आज भी पहले जैसे भारत की कल्पना तो करते हैं। उनका कहना है कि देश ने धीरे-धीरे तरक्की तो की है लेकिन उस तरक्की में हमने बहुत कुछ खोया भी है। आबाद रहने वाले गांव आज वीरान हैं। कृषि प्रधान देश में लोगों ने कई जगह खेती छोड़ दी है। हम आधुनिकता का जीवन तो जी रहे हैं लेकिन इसमें सुकून नहीं है।
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एक दौर था जब ईमानदारी थी। अधिकारी, कर्मी ईमानदारी से काम करते थे। देश की तरक्की होने लगी तो भ्रष्टाचार भी व्याप्त हो गया। भ्रष्टाचार के कारण काम समय पर नहीं हो पाते हैं। जिस काम को एक, दो माह में पूरा होना चाहिए था, उस काम को पूरा होने में सालों बीत जाते हैं। आम आदमी को सबसे अधिक तकलीफ से गुजरना पड़ता है। देश की तरक्की के लिए आम जनता, अधिकारी, नेता सभी को अपने भीतर ईमानदारी पैदा करनी होगी, तभी देश के हर व्यक्ति का भला हो सकता है।
राजेंद्र पाल, खोलियागांव।

पहले भारत को सोने के चिड़िया कहा जाता था। लोग कृषि कार्य करते थे। लोगों में एक दूसरे के प्रति अपनापन था। धन-धान्य की कोई कमी नहीं थीे, लेकिन आबाद रहने वाले गांव आधुनिकता के दौर में पलायन के कारण वीरान हो गए। गांव से देश के विकास का महत्व पता चलता है। विकास तो गांव तक पहुंचा, लेकिन वह भी आधा अधूरा। आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के कारण सुविधा संपन्न नगरीय क्षेत्रों के लिए पलायन कर रहे हैं। गांवों को फिर से आबाद करने की जरूरत है।
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पुरुषोतम उपाध्याय, अस्कोट।
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देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार की क्रांति तो बढ़ी है, लेकिन भ्रष्टाचार भी तेजी से फैला है। अगर देश में भ्रष्टाचार नहीं होता तो विकास कार्यों के लिए आने वाला पैसा पूरा निर्माण में लगता। आजकल तो बिना कमीशन के कोई काम ही नहीं करता है। विकास तो हो रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार की नींव पर। हर एक क्षेत्र में भ्रष्टाचार का दीमक देश को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार को समाप्त करना होगा।
कल्याण राम, भैंसखाल, नाचनी।
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बुजुर्गों की नजर में आजादी के मायने

तरक्की हुई है, गरीबी भी घटी लेकिन आर्थिक असमानता बढ़ी

संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। आजादी के अमृत महोत्सव काल में पांच दिन बाद देश आजादी का जश्न मनाएगा। स्वतंत्रता के 76 साल पूरे होने का उल्लास और उत्साह हर तरफ है। इस मौके पर बुजुर्ग लोग देश के अतीत से आज तक हुए बदलाव को याद करते हैं। उनकी यादों में हर रंग है, हर्ष का भी और उमंग का भी। देश के सम्मुख चुनौतियां और उनसे निपटने के तरीकों पर बुजुर्गों की अपनी राय है। देश आगे बढ़ा है। इसे ये बुजुर्ग एक राय से मानते हैं। लेकिन आगे बढ़ने के तरीकों पर उनकी राय जुदा है।

कोट
जिंदगी के आठ दशक में देश के हर रंग देखे हैं। बदलाव देश में अलग-अलग क्षेत्रों में ही नहीं, उनके गांव में भी नजर आता है। सड़क पहुंच गई, बिजली पहुंच गई। ये अच्छे पहलू हैं लेकिन सेहत से गांव अब भी दूर है। खेती पर जंगली जानवरों की मार के बाद रोजगार के मौके भी गांव में गायब हो चले हैं। काश ये सुखद बदलाव भी हो।

चिंतामणि जोशी, अमकड़िया।
कोट

देश की तरह चंपावत भी बदला। नेपाल सीमा से लगा यह जिला धीमे-धीमे विकास की राह पर बढ़ रहा है, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन विकास की गति धीमी है और लाभ भी हर वर्ग को नहीं मिल रहा है। नए उद्यम खुले नहीं ऊपर से सार्वजनिक क्षेत्र की रोजिन टरपनटाइन फैक्टरी के बंद होने से रोजगार की उम्मीदों को झटका लगा है।
प्रेमबल्लभ जोशी, चंपावत।
कोट
आजाद भारत के 76 साल में विकास की कई अहम गाथा लिखी गई है। देश, प्रदेश से लेकर जिले में प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है। पैदल राह अब सड़क में तब्दील हो गई हैं। लेकिन पहले की तरह रोजगार अब नहीं है। उच्च शिक्षा से लेकर उम्दा स्वास्थ्य सेवा का इंतजार यह जिला अब भी कर रहा है।
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माधो सिंह अधिकारी, किमतोली।
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