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ईको सेंसिटिव जोन में स्थायी निर्माण कार्य पर रोक से चिंता

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धारचूला में ईको सेंसटिव जोन को लेकर चर्चा करते विभिन्न संगठनों के लोग। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला (पिथौरागढ़)। ईको सेंसिटिव जोन के विस्तार को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद विभिन्न संगठनों के लोगों ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ईको सेंसिटिव जोन में स्थायी निर्माण कार्यों पर रोक लगाना चिंतनीय है। इससे सीमांत का विकास प्रभावित हो सकता है। लोगों ने कहा कि वह जल्द ही अपने पक्ष को न्यायालय और सरकार के समक्ष रखेंगे।
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रं म्यूजियम में हुई बैठक में रं कल्याण संस्था, व्यापार संघ और जन प्रतिनिधियों ने कहा कि तीन जून 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने ईको सेंसिटिव जोन के विस्तार और उस क्षेत्र में स्थायी निर्माण कार्य पर प्रतिबंध के आदेश दिए हैं। रं कल्याण संस्था के केंद्रीय अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी बिशन सिंह बोनाल ने कहा कि ईको सेंसिटिव जोन के एक किलोमीटर दायरे तक कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन क्षेत्रों में स्थायी निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया है जो चिंता का विषय है। इससे सीमांत क्षेत्र के लोगों को आवश्यक विकास कार्य प्रभावित होने की चिंता है।
उन्होंने कहा कि सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण धारचूला में कई वर्षों बाद सड़क पहुंच रही है। कई स्थानों पर संचार सेवा नहीं है और कई गांवों को अब भी सड़क पहुंचने का इंतजार है। ऐसे में निर्माण कार्य प्रतिबंधित होने से क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें ज्यादा बढ़ जाएंगी। उन्होंने सभी प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, संगठनों से अपने क्षेत्र की परेशानी से सरकार और कोर्ट को अवगत कराने का सुझाव दिया है।
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व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के एक बिंदु से क्षेत्र का विकास अवरोधित होने वाला है। इसलिए क्षेत्र के लोग पुनर्विचार की मांग करेंगे। बैठक में दीपक रोंकली, रूप सिंह दानू, जयेंद्र फिरमाल, नारायण दरियाल भागीरथी खेर, प्रेमा कुटियाल आदि थे।
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