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Pithoragarh News: पिथौरागढ़-चंपावत में इलाज के दावे कच्चे, दुख रही हड्डी, रो रहे बच्चे

Fri, 01 Sep 2023 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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चंपावत जिला अस्पताल में बारी का इंतजार करते मरीज। संवाद
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सीमांत जिलों स्वास्थ्य सेवाओं की हाल दिन पर दिन खराब होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े दावों के बीच अधिकतर सरकारी अस्पतालों के हाल खराब हैं। कहीं डॉक्टर नहीं हैँ तो कहीं दवाओं की कमी बनी हुई है। सबसे ज्यादा समस्या हड्डी रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से आ रही है। हालात ये हैं अपने लाडलों के बीमार होने पर स्थानीय निवासियों को 100 किलोमीटर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिला अस्पताल में भी अगर डॉक्टर अवकाश पर हुआ तो हल्द्वानी ले जाने के अलावा कोई चारा नहीं है।
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बच्चे हुए बीमार तो 100 किमी दूर जाएं या फिर हल्द्वानी तक दौड़ लगाएं
पिथौरागढ़ : पांच लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के तीन पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनात दो डॉक्टर ही हैं। संयुक्त अस्पताल धारचूला, सीएचसी डीडीहाट, गंगोलीहाट, गणाई गंगोली, मुनस्यारी, बेड़ीनाग में बाल रोग विशेषज्ञ का एक-एक पद सृजित है। डीडीहाट को दो दिन पूर्व बाल रोग चिकित्सक मिला है। अन्य किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में 10 वर्ष तक के बच्चों की संख्या करीब 28,000 है। धारचूला, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट से पिथौरागढ़ की दूरी 80 से 100 किमी है। नजदीकी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने पर उपचार के लिए बच्चों को जिला अस्पताल लाना पड़ता है। इतना लंबा सफर तय करने में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार दूरस्थ और दुर्गम गांवों के कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लोग समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाते।

15 साल बाद सीएचसी डीडीहाट में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रकाश चंद्र सिंह की तैनाती हुई है।
24 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग ने उत्तराखंड के विभिन्न अस्पतालों में की है।

पिथौरागढ़ में बाल रोग विशेषज्ञों के आठ पद सृजित हैं। इनमें से दो चिकित्सक जिला अस्पताल में तैनात हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के छह पद खाली थे। इनमें से दो चिकित्सक निदेशालय से मिले हैं। डीडीहाट सीएचसी में भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई है। - एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।
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टूटी हड्डी तो जिला अस्प्ताल में ही जुड़ेगी
सीएचसी का हाल बुरा, कहीं विशेषज्ञ चिकित्सक तो कहीं उपकरणों का अभाव
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। पांच लाख की आबादी वाले सीमांत पिथौरागढ़ जिले में हड्डी रोग का उपचार केवल जिला अस्पताल में मिलता है। जिला अस्पताल के अलावा धारचूला और गंगोलीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में हड्डी रोग विशेषज्ञ तो तैनात हैं, लेकिन इन सीएचसी में अन्य जरूरी सुविधाएं न होने से जटिल ऑपरेशन नहीं हो पाते हैं। इसके लिए मरीजों को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।
सीएचसी बने रेफरल सेंटर
गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, मुनस्यारी, धारचूला, डीडीहाट सीएचसी और पीएचसी सेंटर रेफरल केंद्र बनकर रह गए हैं। पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में एक मात्र स्थायी हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. चनकन्याल और दूसरे उत्तराखंड हेल्थ डेवलपमेंट प्रणाली के माध्यम से डॉ. एमके गुप्ता तैनात हैं। पिथौरागढ़ जिले के अलावा पड़ोसी जिला चंपावत और बागेश्वर के साथ भारतीय सीमा से लगे नेपाल के गांवों से भी मरीज पिथौरागढ़ आते हैं। धारचूला और गंगोलीहाट में हड्डी रोग विशेषज्ञों की तैनाती की गई है। अन्य सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। सीएमओ डॉ. एचसी ह्यांकी ने बताया कि जिला अस्पताल में उपचार से लेकर ऑपरेशन की सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।






गंगोलीहाट में पद खाली

गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। कांग्रेस शासन काल में गंगोलीहाट पीएचसी को सीएचसी बनाया गया। वर्तमान में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती की गई है। एक्स-रे मशीन पुरानी और खराब पड़ी है। सीएचसी गणाईगंगोली में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद नहीं है।


मुनस्यारी में पीपी मोड में मिला था उपचार
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मुनस्यारी सीएचसी में पीपी मोड में मरीजों का हड्डी का इलाज मिलता था। वर्ष 2014 से 2018 तक पीपी मोड में अस्पताल का संचालन था। तब लोगों को उपचार आसानी से मिल जाता था, लेकिन 2018 के बाद मुनस्यारी में भी हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं है। सीएचसी में स्वीकृत पद खाली है। संवाद

धारचूला सीएचसी में 10 साल बाद हड्डी का उपचार
धारचूला (पिथौरागढ़)। उप जिला चिकित्सालय धारचूला में एक पद स्वीकृत है। यहां पर 10 साल बाद लोगों को हड्डी रोग का उपचार मिलना शुरू हुआ है। इस साल एनएचआरएम के माध्यम से एक चिकित्सक की तैनाती हुई है। वर्ष 2023 से पहले लोग उपचार के लिए पिथौरागढ़ अस्पताल आते थे। संवाद


डीडीहाट में मशीनें पर विशेषज्ञ नहीं डीडीहाट
(पिथौरागढ़)। डीडीहाट सीएचसी में हड्डी रोग के लिए सिर्फ मशीनें उपलब्ध हैं जबकि विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। वर्ष 2021 में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई। करीब सात माह रहने के बाद उनका अन्य जगह स्थानांतरण कर दिया गया। संवाद

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चंपावत : हजारों बच्चों के लिए सिर्फ दो डॉक्टर
चंपावत जिला अस्पताल में दो के सापेक्ष एक ही बाल रोग विशेषज्ञ
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। दस साल से कम उम्र के करीब 70,000 बच्चों के लिए चंपावत जिले में सिर्फ दो बाल रोग विशेषज्ञों से काम चल रहा है। लोहाघाट उप जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज की सुविधा तक नहीं है। यहां इस साल के शुरू से बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। इस कारण लोहाघाट के लोगों को बच्चों के इलाज के लिए 15 किमी दूर चंपावत जाना पड़ता है।
चंपावत में जिला अस्पताल और टनकपुर के एसडीएच में एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं लेकिन न्यूबोर्न इस्टेबलाइजेशन यूनिट दो ही अस्पतालों में हैं। चंपावत में बाल रोग विशेषज्ञ के दो में से एक पद खाली है जबकि लोहाघाट में बच्चों के इलाज की सुविधा ही नहीं है। डॉक्टर की कमी से लोहाघाट के ज्यादातर लोगों को बच्चों के इलाज के लिए चंपावत या पिथौरागढ़ जाना पड़ रहा है।



कोट

लोहाघाट में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके लिए एसीएमओ डॉ. केसी भट्ट को सप्ताह में दो दिन बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में लोहाघाट सेवा देने के निर्देश दिए गए हैं। चंपावत में अनुबंधित और टनकपुर में एनएचएम से एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
पांच लाख की आबादी के लिए जिला अस्पताल ही हड्डी उपचार का एकमात्र सहारा



लोहाघाट के लोग झेल रहे दर्द, लग रही लंबी दौड़
चंपावत जिला अस्पताल और टनकपुर में हैं अस्थिरोग विशेषज्ञ

संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। पिछले महीने की बात है, गुमदेश क्षेत्र की 53 साल की महिला का काम के दौरान पांव फिसला लेकिन सबसे पास के लोहाघाट उप जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिल सका। चोटिल महिला को पांव के इलाज के लिए लोहाघाट के बजाय 62 किमी दूर पिथौरागढ़ जाना पड़ा। गुमदेश की ये घटना एक बानगी भर है। लोहाघाट उप जिला अस्पताल में पिछले कुछ महीनों से अस्थिरोग विशेषज्ञ के न होने से ये नौबत आ रही है।
चंपावत जिले में अस्थिरोग विशेषज्ञ के चार पद सृजित हैं और तैनाती तीन की है। जिला अस्पताल में दो और टनकपुर में एक अस्थिरोग के डॉक्टर हैं लेकिन लोहाघाट अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं है। इसके चलते पिछले चार महीनों से यहां हड्डी का इलाज नहीं हो पा रहा है।


कोट

लोहाघाट उप जिला अस्पताल में अस्थिरोग विशेषज्ञ नहीं होने से वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में सप्ताह में दो दिन चंपावत से डॉक्टर को भेजने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही लोहाघाट में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए महानिदेशक को पत्र भेजा गया है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
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