पिथौरागढ़। चैतोल परिक्रमा और मंदिर के लिए रास्ता रोकने से भड़के 22 गांवों के ग्रामीण बृहस्पतिवार को ढोल, नगाड़ों और देव ध्वजाओं के साथ सड़क पर उतर आए। उन्होंने मूल्पा माता और चटकेश्वर बाबा की जय-जयकार कर नारे लगाए। प्रशासन की एमईएस के अधिकारियों से वार्ता के बाद भी इस पर कोई मामले का कोई हल नहीं निकल पाया जिससे ग्रामीणों में और आक्रोश बढ़ गया।
ग्रामीण बृहस्पतिवार को ढोल-नगाड़ों के साथ बस्ते गांव पहुंचे। यहां महापंचायत हुई। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी, मंदिर के पुजारी भुवन चंद्र शर्मा, सभासद दिनेश कापड़ी और 22 गांवों के प्रतिनिधि देवकटिया पहुंचे। उन्होंने यहां सेना के अधिकारियों से बात की। अधिकारियों ने उन्हें चैतोल परिक्रमा के लिए 100 लोगों को एमईएस क्षेत्र से रास्ता देने की बात कही।
प्रतिनिधिमंडल मंदिर के लिए नियमित रास्ता देेने की मांग पर अड़े रहे। काफी देर तक कोई रास्ता नहीं निकलता देख 22 गांवों के ग्रामीण मूल्पा माता की जय, चटकेश्वर बाबा की जय के साथ देवताओं का आह्वान करने लगे। इसके बाद ग्रामीणों ने बस्ते गांव से नेड़ा, धनौड़ा, रई, सिल्थाम, गांधी चौक, नई बाजार, केएमओयू स्टेशन, गुप्ता तिराहा होते हुए कलक्ट्रेट तक जनाक्रोश रैली निकाली जहां उन्होंने डीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठकर नारे लगाए और प्रदर्शन भी किया।
कुछ देर बाद डीएम रीना जोशी, एडीएम एफआर चौहान ग्रामीणों से बात करने पहुंचे। डीएम ने बताया कि एमईएस चैतोल परिक्रमा के लिए 100 लोगों को रास्ता देने को तैयार है। ग्रामीणों ने कहा कि सभी को चैतोल जाने की अनुमति मिलनी चाहिए। डीएम के कई समझाने के बाद ग्रामीण नहीं माने और वहीं धरने पर बैठ गए। इस दौरान ऋषेंद्र महर, मयूख भट्ट, ललित शर्मा, शमशेर महर, अभिषेक बोहरा, राजेश्वरी शर्मा आदि मौजूद थे। वहीं जुलूस के चलते रई और सिल्थाम में जाम की स्थिति भी रही।
चैतोल और मंदिर जाने के लिए स्थायी रास्ता देने की मांग
पिथौरागढ़। 22 गांवों के ग्रामीणों ने चैतोल परिक्रमा और मंदिर जाने के लिए स्थायी रास्ता देने की मांग की है। मंदिर के पुजारी भुवन चंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि एमईएस ने मंदिर के चारों ओर तारबाड़ लगा दिया है। मंदिर में कई सालों से रहने वाली माई (संत) को भी इससे दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि 22 गांवों के आस्था के प्रतीक मूल्पा मंदिर के लिए हर किसी व्यक्ति को स्थायी रास्ता मिलना चाहिए। संवाद
जुलूस के कलक्ट्रेट पहुंचाने के बाद नेताओं ने बनाई दूरी
पिथौरागढ़। बस्ते गांव से कलक्ट्रेट तक निकले जुलूस में राजनीतिक पार्टियों के लोग शामिल नहीं हुए। वह बस्ते में महापंचायत के बाद वाहनों से सीधे कलक्ट्रेट पहुंचे। जुलूस के कलक्ट्रेट पहुंचने के बाद वह धीरे-धीरे दूरी बनाने लगे। संवाद
मंदिर जाने के लिए बनाया जाएगा गेट
पिथौरागढ़। भाजपा जिलाध्यक्ष गिरीश जोशी, पालिकाध्यक्ष राजेंद्र रावत, नगर मंडल अध्यक्ष दिनेश कापड़ी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बुधवार शाम डीएम से मुलाकात की थी। पालिकाध्यक्ष ने बताया कि मंदिर के लिए स्थायी गेट बनाने और सिलोली वाले मंदिर के लिए भी रास्ता देने पर सहमति बनी है। कहा कि वह और डीएम इस मामले में सैन्य अधिकारियों से लगातार बात कर रहे हैं। इस दौरान राकेश देवलाल, इंदर लुंठी, विरेंद्र बोरा मौजूद थे। संवाद
चैतोल परिक्रमा को रास्ता देने के लिए प्रशासन ने सेना के अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ बैठक की। सेना ने शर्तों के साथ रास्ता देने पर सहमति दी है। -रीना जोशी, डीएम पिथौरागढ़।
हमारी धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा रहा है। पूर्वजों ने एमईएस को जमीन दी थी। इस तरह मंदिर और चैतोल परिक्रमा का रास्ता रोकना गलत है। अगर स्थायी रास्ता शीघ्र नहीं दिया गया तो आंदोलन किया जाएगा। -राजेश शर्मा, बस्ते गांव।
मंदिर के लिए रास्ते की व्यवस्था करनी चाहिए। जिस रास्ते से सदियों से चैतोल चलती आ रही है। उसी रास्ते से चैतोल जा सकती है। चैतोल अपना रास्ता नहीं बदल सकती है। जिला प्रशासन और एमईएस को मिलकर समाधान करना होगा। -कमल चंद, जीबी गांव।
सदियों से मां मूल्पा देवी की सेवा करता आ रहा हूं। इस तरह का व्यवधान पहली बार आया है। मंदिर और चैतोल पर्व का रास्ता रोकना गलत है। प्रशासन एवं एमईएस को मंदिर और चैतोल परिक्रमा के लिए रास्ता देना ही होगा। -भुवन चंद्र शर्मा, मंदिर के पुजारी
देवल समेत बाबा छह पट्टी सोर के अराध्य देवता हैं। वह चैत्र माह में बहनों को भिटौली देने के लिए 22 गांवों की परिक्रमा करते हैं। इस तरह रास्ता रोकना गलत है। रास्ता देना ही होगा। -गोपू महर, कुमौड़।
चैतोल परिक्रमा 22 गांवों की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। महापंचायत के माध्यम से ये मांग है कि हमारे धार्मिक और पौराणिक रास्ते नहीं खोले गए तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। -महेंद्र लुंठी, लिंठ्यूड़ा।
हमारी आस्था को आहत नहीं करते हुए रास्ता खोलना चाहिए। अगर हमारी मांग पूरी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। -भावना नगरकोटी।