झूलाघाट (पिथौरागढ़)। सीमांत क्षेत्र में संचार सेवा बदहाल पड़ी है। बीएसएनएल के मोबाइल टॉवर में न तो बैटरी की व्यवस्था है और न जनरेटर ही है। इसके चलते बिजली जाते ही मोबाइल फोन के सिग्नल भी गायब हो जाते हैं। इन हालातों में लोगों को नेपाल की संचार कंपनियों के भरोसे रहना पड़ता है।
नेपाल सीमा से लगे झूलाघाट से लेकर जौलजीबी और हल्दू पंचेश्चर तक 10 से अधिक गांवों की 10 हजार से अधिक की आबादी के लिए बीएसएनएल ही संचार का एकमात्र माध्यम है। इसके लिए मजिरकांडा में टावर लगा है। टावर में न तो बैटरी है और न जनरेटर। इस कारण बिजली जाते ही मोबाइल के सिग्नल गायब हो जाते हैं। इंटरनेट सेवाएं ठप होने से बैंक, पोस्टआफिस का कामकाज भी प्रभावित हो जाता है।
यह दिक्कत अक्सर आने से भारत के साथ ही नेपाल से झूलाघाट आने वाले नेपाली पेंशनरों और अन्य नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सीमा के कुछ गांवों में निजी कंपनियों के सिग्नल भी आते हैं लेकिन इसका अधिक लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे में लोगों को आपात स्थिति में नेपाल की संचार कंपनियों के भरोसे रहना पड़ता है।
बलतड़ी के क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेश भट्ट, सिमू गांव के प्रताप चंद, कानड़ी के लक्ष्मण चंद, झूलाघाट के नवीन भट्ट, गेठीगाडा के पुष्कर सिंह गोबाड़ी ने मोबाइल टावर एवं दूरभाष केंद्र में नई बैटरी लगाने की मांग की है। इस संबंध में बीएसएनएल के एसडीई मोहम्मद खालिद ने बताया कि शीघ्र ही नई बैटरियां और जनरेटर की व्यवस्था कर ली जाएगी।