पिथौरागढ़। बीडी पांडे जिला अस्पताल के रक्त केंद्र में ब्लड कंपोनेंट यूनिट लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। यूनिट में प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पैक्ड सेल का उत्पादन छह माह पूर्व शुरू होने के बाद कैंसर, सर्जिकल और जले हुए मरीजों को पूरा रक्त नहीं चढ़ाना पड़ रहा है। इससे रक्त की भी बचत हो रही है।
रक्त केंद्र में ब्लड कंपोनेंट यूनिट का संचालन अप्रैल 2023 में शुरू किया गया। यूनिट का संचालन होने से सामान्य, डेंगू मरीज, गर्भवतियों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पैक्ड सेल के लिए हल्द्वानी, बरेली की दौड़ नहीं लगानी पड़ रही है। यूनिट के संचालन से मरीजों को नया जीवन मिल रहा है। पिथौरागढ़, सेना अस्पताल, चंपावत के साथ ही अन्य जिलों से भी प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पैक्ड सेल की मांग लगातार आ रही है।
सर्जिकल मरीजों को फ्रोजन प्लाज्मा, एनेमिक मरीज को पैक्ड सेल आसानी से मिल रहे हैं। कैंसर, सर्जिकल और जले मरीजों के लिए प्लाज्मा रामबाण साबित हो रहा है। अब तक करीब 100 से अधिक मरीजों को इन कंपोनेंट को चढ़ाया गया है। संवाद
प्लाज्मा से बनती हैै जीवन सुरक्षा दवा
पिथौरागढ़। एक्सपायर हो चुके प्लाज्मा से जीवन रक्षक दवा बनाई जाती है। रक्त केंद्र प्रभारी डॉ. नरेंद्र शर्मा ने बताया कि प्लाज्मा से एल्ब्यूमिन नाम की दवा बनाई जा सकती है। अस्पताल में पिछले माह 11 साल के बच्चे की प्लेटलेट्स शून्य हो गई थी, जिसे प्लेटलेट्स चढ़ाई गई। जिसके बाद वह अब पूरी तरह स्वस्थ है। आठ साल के एक बच्चे के साथ ही गर्भवती को भी प्लेटलेट्स चढ़ाए गए जबकि पूर्व में मरीजों को पूरा रक्त चढ़ाना पड़ता था और कई बार उन्हें इन कंपोनेंट के लिए बाहरी जिले की दौड़ लगानी पड़ती थी।
ब्लड कंपोनेंट की लाइफ
-प्लेटलेट्स पांच दिन
-पैक्ड सेल 45 दिन
-प्लाज्मा एक साल
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इनसेट कोट-
ब्लड कंपोनेंट यूनिट का संचालन शुरू होने से मरीजों को पूरा खून नहीं चढ़ाना पड़ रहा है। जले में कैंसर, सर्जिकल, जले के मरीजों को सिर्फ प्लाज्मा चढ़ाया जा रहा है। डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स और पैक्ड सेल सामान्य मरीज को दिए जा रहे हैं। ब्लड के कंपोनेंट इलाज में काफी मददगार होते हैं। मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर कंपोनेंट बनाए जा रहे हैं।
- डॉ. नरेंद्र शर्मा, रक्तकेंद्र प्रभारी, पिथौरागढ़।