बंगापानी(पिथौरागढ़)। बंगापानी तहसील नौ साल से स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति के लिए तरस रही है। तहसीलदार न होने के कारण लोगों को जरूरी प्रमाणपत्रों को बनाने मुनस्यारी और धारचूला तहसील की दौड़ लगानी पड़ती है। पूर्व ग्राम प्रधान भगत मेहरा ने बताया कि फरवरी 2015 में बंगापानी में तहसील स्थापित हो गई थी। स्थापना के नौ साल बाद भी यहां स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि बंगापानी तहसील का चार्ज कभी धारचूला तो कभी मुनस्यारी तहसीलदार को दिया जाता है। इस कारण क्षेत्र के लोगों को आय, जाति समेत अन्य प्रमाणपत्र बनाने के लिए धारचूला और मुनस्यारी दौड़ लगानी पड़ती है। उन्होंने सीमांत क्षेत्र में तहसीलदार की नियुक्ति करने की मांग की है।