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अवध में कह मुख ले जाऊं....

Sun, 18 Oct 2015 10:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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 पिथौरागढ़ सदर और टकाना की रामलीला में पंचम दिवस वनवास और दशरथ मरण तक की लीला का मंचन किया गया। गंगोलीहाट, थल, बेड़ीनाग, मुनस्यारी में रामलीला जारी है। शहर की दोनों रामलीलाओं में राम-कौशल्या संवाद से रामलीला की शुरुआत हुई। राम-सीता संवाद, राम-लक्ष्मण संवाद के बाद राम वन गमन का दृश्य मंचित किया गया। वन में राम-केवट मिलन का सुंदर मंचन किया गया। राम, लक्ष्मण, सीता जब केवट की नाव में बैठने लगते हैं तो मंत्री सुमंत नाना प्रकार से राम को अयोध्या वापस चलने के लिए समझाते हैं, भगवान राम नहीं मानते। सुमंत वापसी में कहते हैं ‘अवध में कह मुख ले जाऊं कहूं क्या पूछे जब राजा। राम-लखन वन को गए मैं घर लौटा आय’। सुमंत राजा दशरथ को राम, लक्ष्मण, सीता के वन में प्रवेश का समाचार सुनाते हैं। पुत्र वियोग में राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं।
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गंगोलीहाट। गंगोलीहाट की रामलीला में धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। परशुराम-लक्ष्मण संवाद को काफी सराहा गया।
बेड़ीनाग। बेड़ीनाग की रामलीला में धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। सीता स्वयंवर में राजा विविध रूप धरकर पहुंचे थे।
मुनस्यारी। मुनस्यारी की रामलीला में राम वनवास का मंचन हुआ। ठंड के बावजूद लोग रामलीला देखने पहुंच रहे हैं।
थल। थल की रामलीला में शनिवार को धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन हुआ। सीता स्वयंवर में रावण समेत तमाम देशों के राजा अपना बाहुबल दिखाते हैं।
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