संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़। वन पंचायतों की रमणीक जगहों पर छोटे-छोटे ईको पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके लिए वन विभाग ने वन पंचायतों से रमणीक जगहों के प्रस्ताव मांगे हैं। छोटे ईको पार्क बनने से पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और इससे वन पंचायतों की आय में भी सुधार होगा, स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा।
सीमांत जिले में 1635 वन पंचायतें हैं। पर्यटन गतिविधियां बढ़ाने के लिए वन विभाग वहां ईको पार्क विकसित करेगा। इसके लिए वन पंचायतों से प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं। वन पंचायतों से प्रस्ताव मिलने के बाद छोटे-बड़े झरने, रमणीक जगहों पर ईको पार्क विकसित करने का कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। डीएफओ डॉ. विनय भार्गव ने बताया कि जिन पंचायतों में ईको पार्क विकसित किए जाएंगे। उन स्थानों पर आने वाले पर्यटकों की पर्चियां काटी जाएंगी। इससे वन पंचायतों की आय में सुधार होगा। साथ ही स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा। उनका कहना है कि कोविड-19 के कहर के बाद बेरोजगार हुए प्रवासियों को भी वहां रेस्टोरेंट, टूरिस्ट गाइड बनकर रोजगार मिलेगा।
---::: जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण को लेकर भी होंगे कार्य ::: पिथौरागढ़। वन विभाग जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण को लेकर भी कार्य करेगा। जल संरक्षण के लिए वन पंचायतों में चाल-खाल का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा पारंपरिक जड़ी बूटी और विलुप्त हो रही जड़ी बूटियों के संरक्षण को लेकर भी कार्य किए जाएगा। जड़ी बूटी व जंगली फलों के संरक्षण के लिए कार्य किए जाएंगे। वन पंचायतों में अग्नि दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने को लेकर भी कार्य किए जाएंगे।
---:: इन जड़ी बूटियों और जंगली फलों का होगा संरक्षण किरमोड़ा, हिसालू, काफल, गुर्जा, सतवर, इंद्राणी, तिमूर, सतवर, तेजपात, रीठा, च्यूरा, सम्यौ आदि।
---::: अध्यक्ष बोले- "प्रदेश की वन पंचायतों में छोटे ईको पार्क बनाए जाएंगे। इसके लिए वन विभाग से प्रस्ताव मंगाए गए हैं। प्रदेश में 12168 वन पंचायतें हैं। इसमें 50 प्रतिशत वन पंचायतें सक्रिय हैं। इन वन पंचायतों में 5.40 लाख हेक्टेयर वन भूमि है। जिन 50 प्रतिशतों में चुनाव हुए हैं उन ही वन पंचायतों में ईको पार्क विकसित किए जाएंगे। 33 प्रतिशत वन पंचायतों में महिला सरपंच हैं।" - विरेंद्र बिष्ट, अध्यक्ष वन पंचायत सलाहकार समिति।