भारतीय सेना के 19 और बीएसएफ के 5 पैराग्लाइडिंग पायलट सोमवार से यहां पैराग्लाइडिंग की प्रैक्टिस करेंगे। सेना और बीएसएफ के पायलट खुद को इतना मजबूत बना लेना चाहते हैं कि पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता में जौहर दिखा सकें। रविवार को कनाडा के बैंजामिन, हैदाराबाद के मुरली और गुजरात के जिगेश ने कनारीपाभै में प्रैक्टिस शुरू कर दी है। उत्तराखंड पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के सचिव शंकर सिंह ने रविवार को बताया कि अब तक 98 पायलटों ने पंजीकरण कर दिया है। प्रतियोगिता में कुल 100 पायलट हिस्सा लेंगे।
शंकर सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की दिशा में यह अब तक की सबसे बड़ी पहल है। उन्होंने बताया कि 14 मार्च से शुरू होने वाली प्रतियोगिता में कनाडा, अमेरिका, ब्राजील, ब्रिटेन, स्पेन, फ्रांस, रूस, उजवेकिस्तान, नेपाल, फिनलैंड के साथ भारत के पायलट हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता के दौरान यहां के लोगों को रोमांच का अनुभव होगा। जब पायलट आसमान में करतब दिखाएंगे तो यह सबसे अधिक रोमांचित करने वाला क्षण होगा।
पिथौरागढ़ में पैराग्लाइडिंग के कई स्पॉट
पिथौरागढ़। उत्तराखंड पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के सचिव शंकर सिंह का कहना है कि पिथौरागढ़ में कनारीपाभै, बरखालेक, मेलडुंगरी, लेलू टॉप, देवकटिया, गंगोलीहाट में डूनी और मुनस्यारी में खलियाटॉप पैराग्लाइडिंग के लिए बेहतरीन स्पॉट हैं। इन स्थानों का पहले सर्वे किया जा चुका है। चंडाक में भी पहले बेहतरीन स्पॉट था लेकिन बिजली की हाइटेंशन लाइन के कारण अब यहां पर पैराग्लाइडिंग संभव नहीं हो पाती।
सोर एडवेंचर क्लब ने की थी शुरुआत
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ के लोगों को पैराग्लाइडिंग से परिचित कराने का श्रेय सोर एडवेंचर क्लब को जाता है। 1993 से इस क्लब ने पैराग्लाइडिंग की गतिविधियां शुरू की। शंकर सिंह इसी क्लब के सदस्य रहे हैं। उस दौर में पवन कुमार जोशी, हरिओम गुरुंग, देवेंद्र वल्दिया समेत कई लोगों ने कई बार पैराग्लाइडिंग की थी। इस समय अशोक भंडारी भी पैराग्लाइडिंग के कोर्स कराते रहते हैं।