पिथौरागढ़। जिले के अधिकतर नगरीय क्षेत्र में पेड़ों पर लोहे की मोटी-मोटी कील ठोक कर प्रचार सामग्री के बोर्ड लगाए गए हैं। यही नहीं पेड़ों पर कील ठोक कर बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इन पर पर्यावरण संरक्षण की अपील की जा रही है। यह कोई ध्यान नहीं दे रहा है कि पेड़ों पर कील ठोक कर उनकी सांसें छीनी जा रही हैं और पेड़ों की आयु भी इन कील की वजह से कम हो जाती है और पेड़ कमजोर हो जाते हैं।
पिथौरागढ़ में पेड़ों पर इन स्थानों पर लगाए हैं बोर्ड
कुमौड़, हनुमान मंदिर, टनकपुर रोड, एफसीआई गोदाम के पास, पाइन रिसोर्ट के पास, धमौड़, एपीएस के पास, कासनी, देवलाल गांव, पंडा और जाजरदेवल।
जिले भर में जहां भी पेड़ों पर कील लगाकर बोर्ड या प्रचार सामग्री लगाई गई है। उसे हटाया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। - रीना जोशी, डीएम पिथौरागढ़।
पेड़ों की छाती पर ठोकेंगे कील तो कैसे होगी हरियाली
चंपावत। हरेला पर्व से शुरू पौधरोपण पूरे महीने चलेगा और इस दौरान एक लाख से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। पौधों को बचाने के लिए भी शपथ, संकल्प से लेकर सुरक्षा दस्ते बनाए गए हैं। वन विभाग हरेला वन बनाएगा। इतना सब होने के बाद पौधों से लेकर भरे पूरे पेड़ों को लेकर संजीदगी किस कदर है, इसका अंदाज पेड़ों पर प्रचार होर्डिंग के लिए ठोकी गई कील से लगाया जा सकता है।
इधर डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि पेड़ों पर कील ठोकना अनुचित है। न ही पेड़ों को किसी तरह के प्रचार अथवा कारोबारी गतिविधियों का माध्यम बनाया जा सकता है। क्षेत्र में इस तरह की प्रवृत्ति को रोकने के लिए वन विभाग नगर पालिका और जिला पंचायत के साथ मिलकर प्रयास करेगा। जरूरी हुआ, तो कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।