अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़। अपने लाल की शहादत के बाद से ही शहीद शंकर सिंह की माता जानकी देवी बदहवास हैं। शंकर सिंह के पैतृक आवास पर सुबह के समय छाई खामोशी को बीच-बीच मे शहीद की मां जानकी देवी की चीत्कार भंग कर देती। जानकी देवी बिलख-बिलख कर कहतीं अब मैं कैथे कूलों शंकर......। अपने लाल को खोने वाली जानकी देवी बिलख बिलख कर रोती रहीं। महिलाएं सांत्वना देती तो कहती अब मैं शंकर किसको कहूंगी। हिचकियों के बीच खुद से ही सवाल करती कि शंकर का बेटा हर्षित उनसे पूछ रहा है मेरे पापा कब आएंगे, अब मैं उसे क्या जवाब दूं। उनकी इस बात से सांत्वना देने आए महिलाएं भी रोने लगती। शंकर बेहद मिलनसार व्यवहार के थे। उनके निधन से पूरा गाँव शोक में डूबा है।