अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़। आयुष मंत्रालय भारत सरकार और विभिन्न प्रदेश सरकारों के प्रयास से आयुर्वेदिक दवाओं पर हो रहे शोधों में सकारात्मक परिणाम नजर आ रहे हैं। इससे आम लोगों में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता हुई है और अधिक से अधिक लोग आयुर्वेदिक चिकित्सालयों का रुख कर रहे हैं।
आयुर्वेद अनुसंधान विशेषज्ञ एवं पीपली के प्रभारी चिकित्सक डा.अवनीश उपाध्याय के अनुसार आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली औषधियों की भरमार है। चीन एवं अन्य देशों में कोविड रोगियों की निर्धारित चिकित्सा में विटामिन सी को शामिल कर अच्छे परिणाम प्राप्त किए। डा. उपाध्याय के अनुसार आयुर्वेद चिकित्सा में सामान्य रूप से उपयुक्त होने वाली बनस्पतियों गिलोय, अश्वगंधा, पिप्पली, मुलेठी, तुलसी, अड़ूसा, लौंग, दालचीनी, अदरख, काली मिर्च, काकड़ासृंगी, अकरकरा आदि का रोग प्रतिरोध एवं श्वसन संस्थान की बीमारियों में बेहतर प्रभाव होता है।
उन्होंने बताया कि आयुष मंत्रालय ने कोरोना महामारी के रोकथाम व चिकित्सा एवं अन्य चिकित्सीय प्रभावों पर अध्ययन के लिए अधिसूचना जारी की गई है। मंत्रालय की ओर से जारी आयुष संजीवनी एप के माध्यम से आयुर्वेद के चिकित्सीय लाभों को एक अध्ययन के रूप में सम्मिलित करने का अवसर प्रदान किया है जिसके लिए उन्हें नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
आयुर्वेद चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट अपने चिकित्सालय में आयुष एडवाइजरी की औषधियों संशमनी वटी (गिलोय घन वटी), अगस्त्य हरीतकी, च्यवनप्राश एवं सामान्य सुलभ उष्ण जल, हल्दी दूध, शीशम आयल, योगासन, प्राणायाम, ध्यान, नस्य, पुदीना एवं अजवाइन की उष्ण भांप, शर्करा या शहद के साथ लौंग के चिकित्सीय प्रभावों का अध्ययन कर सकते हैं।