बंगापानी के घन्धूरा जंगल में लगी आग। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए 68 क्रू स्टेशन बनाकर 200 फायर वाॅचर तैनात किए गए हैं। बावजूद इसके जिले के कई क्षेत्रों में जंगल धू-धूकर जल रहे हैं। दो दिन पूर्व हुई बारिश और ओलावृष्टि ने जंगलों की धधकती आग को बुझा दिया था लेकिन अब फिर से जंगल आग से जल रहे हैं।
इस सीजन में वनाग्नि की कुल 79 घटनाएं हुई हैं। आरक्षित वन पंचायत में आग की 30 घटनाओं में 33.05 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। सिविल वन पंचायत में आग की 49 घटनाओं में 50.85 हेक्टेयर जंगल जला है। आग से वन विभाग को 21,4,400 रुपये का नुकसान हुआ है। बेड़ीनाग, थल, अस्कोट, डीडीहाट के जंगल आग से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। आग बुझाने के लिए विभाग के पास आठ एयर ब्लोअर और अन्य उपकरण हैं।
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पिथौरागढ़ जिले में हैं 1600 वन पंचायत
पिथौरागढ़। जिले में 1600 वन पंचायत हैं। इनमें से वनाग्नि की दृष्टि से 382 वन पंचायतें अति संवेदनशील की श्रेणी में हैं। पिथौरागढ़ वन प्रभाग के एसडीओ ज्वाला प्रसाद गौड़ ने बताया कि सरपंच आग बुझाने में सहयोग कर रहे हैं। साथ ही जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का भी सहयोग लिया जा रहा है। संवाद
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आग से धधक रहा है घन्धूरा का जंगल
बंगापानी। अस्कोट कस्तूरा अभयारण्य का घनधूरा जंगल पिछले एक हफ्ते से आग से धधक रहा है। दो दिन पूर्व हुई बारिश से आग की घटनाएं कम हो गई थीं लेकिन सोमवार को जंगल में आग फिर से धधक उठी। आग से उठने वाले धुएं से क्षेत्र में धुंध छा गई है। जंगल में लगने वाली आग से जहां बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है वहीं लोगों के गले में खराश और आंखों में जलन की समस्या भी होने लगी है। लोगों ने वन विभाग से शीघ्र आग पर काबू पाने का अनुरोध किया है। संवाद