पिथौरागढ़। राजकीय संग्रहालय में कोमल गांधार नाटक का सफल मंचन हुआ। महाभारत की पात्र गांधारी पर केंद्रित इस नाटक के जरिए स्त्री मन की व्यथा को सामने लाने की कोशिश की गई। नाटक में गांधारी महाभारत के पात्र धृतराष्ट्र की पत्नी होती हैं। वह पति के अंधे होने के बाद खुद भी आंखों पर पट्टी बांध देती हैं। गांधारी का पतिव्रत धर्म इस नाटक में सामने लाने का प्रयास हुआ। साथ ही उनकी व्यथा को भी इस रूप में प्रकट किया गया कि उन्होंने आंखें होते हुए भी उनसे न देखने का संकल्प लिया था। डॉ. शंकर शेष लिखित इस नाटक का निर्देशन मनोज लीला भट्ट ने किया। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ में नाट्य गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए यह प्रयास किया गया। उन्होंने नाटक की विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोमल गांधार नाटक स्त्री प्रधान है। इसमें महिला को ही केंद्र में रखा गया है। नाटक में कलाकारों ने अभिनय के माध्यम से लोगों में बड़ा संदेश देने की कोशिश की। कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में लोग नाटक देखने के लिए पहुंचे। नाटक के मंचन में भाव राग ताल नाट्य अकादमी के कैलाश कुमार ने भी सहयोग दिया।