पिथौरागढ़। सीमांत जिले में कार्यरत 50 नियमित, संविदा, अधिसंख्य दंत शल्य चिकित्सक पीजी कोर्स के लिए रवाना हो गए हैं। पहले ही जिला विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। अब इनके जाने के बाद विभिन्न अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी असर पड़ेगा। तीन साल बाद यह चिकित्सक पीजी कोर्स कर लौटेंगे।
जिले में बीडी पांडे जिला अस्पताल समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से 50 चिकित्सक पिछले माह पीजी कोर्स के लिए रवाना हुए थे। पीएचसी इग्यारदेवी, जिला चिकित्सालय, राजकीय ऐलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्र धरमघर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चौरपाल, पीएचसी कनालीछीना, अतिरिक्त पीएचसी आणागांव, पीएचसी बड़ालू, राजकीय ऐलोपैथिक चिकित्सालय मड़मानले, अतिरिक्त पीएचसी खुमती, सीएचसी डीडीहाट, सीएचसी तेजम, अतिरिक्त पीएचएसी भागीचौरा, अतिरिक्त पीएचसी गणाई, टीबी क्लीनिक पिथौरागढ़, सीएचसी मुनस्यारी, पीएचसी, पीएचसी मदकोट, नाकोट से नियमित बांडधारी, उप जिला चिकित्सालय धारचूला से नियमित, पीएचसी बोना से नॉन बांडधारी से 24 चिकित्सव गए हैं।
झूलाघाट, मुनस्यारी, भागीचौरा, मदकोट, सेल, मदकोट, देवलथल टाइप ए, डीडीहाट, चमाली, इग्यारदेवी, पीएचसी देवलथल, तीतरी, गणाईगंगोली, कनालीछीना, सीएचसी बेड़ीनाग, महिला चिकित्सालय बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, गणाई गंगोली, जिला महिला चिकित्सालय से 23 बांडधारी और पीएचसी बनाकोट, देवलथल, पांगू से अधिसंख्या दंत शल्य पीजी अध्ययन के लिए गए हैं। एक साथ 50 चिकित्सकों के चले जाने से ग्रामीण क्षेत्रों की चिकित्सा सेवाएं लड़खड़ाने की आशंका है।
कोट
जिले के चिकित्सालयों और स्वास्थ्य केंद्रों से 50 नियमित, संविदा, अधिसंख्य दंत शल्य चिकित्सक पीजी कोर्स के लिए चले गए हैं। कोर्स पूरा कर लौटने के बाद भी वह अपनी सेवाएं दे सकेंगे। - डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ पिथौरागढ़।