पिथौरागढ़। नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी दो अभियुक्तों को विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) शंकर राज ने 20-20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर कुल 85 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
मामले के अनुसार बलुवाकोट क्षेत्र निवासी पीड़िता 10वीं कक्षा में पढ़ती थी। फोन से उसकी पहचान हल्दूचौड़ (लालकुआं) निवासी प्रदीप रावत से हुई। नवंबर 2020 में प्रदीप एक मंदिर में जाने के लिए आया और पीड़िता के घर पर रुका। रात को उसने पीड़िता के कमरे में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घटना के बाद जनवरी 2021 में प्रदीप ने हल्दूचौड़ निवासी अजय दुम्का को भेजकर पीड़िता को हल्द्वानी आने को कहा। अजय वाहन से उसे हल्द्वानी ले गया जहां उसने जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए।
इस मामले में परिजनों की तहरीर पर बलुवाकोट थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। यह मामला विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत में चला। विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अभियुक्त अजय दुम्का को आईपीसी की धारा 363 में सात वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 366 क के लिए 10 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दोष सिद्ध अजय दुम्का को धारा 376(2)( झ) (3) के अपराध के लिए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर पांच वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
अभियुक्त को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा (3)( 1) (xii) के अपराध के लिए पांच वर्ष के कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दोष सिद्ध प्रदीप रावत को धारा 376(2)( झ) (3) के अपराध के लिए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। जुर्माना नहीं देने पर पांच वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा (3)(1) (xii) के अपराध के लिए प्रदीप रावत को पांच वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोनों अभियुक्तों की सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अर्थदंड में से 60 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे। न्यायालय ने कहा कि घटना के समय पीड़िता 16 वर्ष से कम आयु की थी। इस अपराध से उसे शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार से अतिरिक्त प्रतिकर दिलाए जाने के निर्देश दिए। मामले की पैरवी डीजीसी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।