व्यक्तिगत नागरिक मामलों का नियंत्रित करने वाले कानून और राज्य में समान नागरिकता संहिता के लिए प्रस्तावित प्रारूप पर गोष्ठी हुई जिसमें विभिन्न वर्गों ने लिव इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार पर विचार रखे। साथ ही महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार देने का सुझाव भी दिया गया।
शुक्रवार को बिड़ला परिसर के एसीएल हॉल में हुई गोष्ठी में समिति के सदस्य व उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि संहिता व कानून का प्रारूप जानने के लिए समिति राज्य के दूरस्थ स्थानों में गई। अधिवक्ता भूपेंद्र पुंडीर ने कहा कि समान नागरिक संहिता बनाने के बजाय निजी कानूनों की संहिता बननी चाहिए। डॉ. सुधीर जोशी ने संहिता बनने के बाद सभी धर्मों में महिलाओं के साथ समान न्याय होगा।
जामा मस्जिद के इमाम मौलान ताजिम ने समान नागरिक संहिता की खिलाफत करते हुए लिव इन रिलेशनशिप पर रोक लगाने का सुझाव दिया। प्रमोद बमराड़ा ने आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को देखते हुए शादी की उम्र सीमा में ढील दी जानी चाहिए। शिवानी पांडेय ने कहा कि गोवा में संहिता बनी है लेकिन इसके बनने से महिलाओं के स्तर में सुधार नहीं हुआ है। समिति की सदस्य व दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि गोष्ठी में रखे गए सुझावों पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
इस अवसर पर समिति के सदस्य मनु गौर, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल डॉ. आशीष चौहान व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे आदि मौजूद थे।