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डेढ़ करोड़ की कुटकी के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

सार

बिना लाइसेंस कुटकी के कारोबार पर प्रतिबंध होने के चलते चौकी इंचार्ज एसआई अजय भट्ट ने कागजात मांगे तो युवक गुमराह करने लगे। उत्पादक और खरीददार को होती है अनुमति की जरूरतकुटकी के उत्पादन के लिए काश्तकारों को जिला भेषज संघ या जड़ीबूटी शोध संस्थान में पंजीकरण करवाना पड़ता है। साथ ही खरीदार को भी वन विभाग से अनुमति लेनी होती है।प्राचीन काल से हो रहा है आयुर्वेद में उपयोगकुटकी (इकरोराइजा कुरुआ) या केदार कड़वी का प्रयोग प्राचीन काल से आयुर्वेद में होता आया है।
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विस्तार
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अवैध रूप से जड़ी-बूटी ले जा रहे सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के दो तस्करों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। युवक कार में चमोली जिले के जोशीमठ से दो क्विंटल 11 किलोग्राम कुटकी बेचने के लिए दिल्ली जा रहे थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद माल की कीमत लगभग 1,40,98,809 रुपये आंकी गई है।
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मंगलवार शाम को कलियासौड़ पुलिस चौकी स्टाफ रोजाना की तरह बदरीनाथ हाईवे पर चेकिंग कर रहा था। इसी दौरान रुद्रप्रयाग की ओर से आ रही टाटा सफारी कार को रोका गया। कार में दो युवक सवार थे। कार की पिछली सीट और पिछले हिस्से में बोरे रखे हुए थे। जब पुलिस ने बोरों के अंदर रखे सामान के बारे में पूछा तो युवकों ने बताया कि इसमें कुटकी है। बिना लाइसेंस कुटकी के कारोबार पर प्रतिबंध होने के चलते चौकी इंचार्ज एसआई अजय भट्ट ने कागजात मांगे तो युवक गुमराह करने लगे। पुलिस की सूचना पर पहुंचे वन अधिकारी बताया कि कुटकी प्रतिबंधित है। इस पर पुलिस ने दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया।
सीओ श्याम दत्त नौटियाल और एसएसआई संतोष पैथवाल ने बताया कि गिरफ्तार किए गए युवकों अंकित चौधरी, निवासी गली न.-3 चंद्रनगर और गौरव कुमार निवासी कृष्णा धाम कॉलोनी टेलीफोन एक्सचेंज रोड हसनपुर चुंगी, थाना सदर बाजार, सहारनपुर के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों ने बताया कि वे जोशीमठ से कुटकी खरीदकर इसे बेचने के लिए दिल्ली जा रहे थे।
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उत्पादक और खरीददार को होती है अनुमति की जरूरत
कुटकी के उत्पादन के लिए काश्तकारों को जिला भेषज संघ या जड़ीबूटी शोध संस्थान में पंजीकरण करवाना पड़ता है। साथ ही खरीदार को भी वन विभाग से अनुमति लेनी होती है।
प्राचीन काल से हो रहा है आयुर्वेद में उपयोग
कुटकी (इकरोराइजा कुरुआ) या केदार कड़वी का प्रयोग प्राचीन काल से आयुर्वेद में होता आया है। स्वाद के कारण इसको कड़वी कहा जाता है। कुटकी हिमालय क्षेत्र के बुग्यालों में 3000 मीटर के आसपास उगती है। कुटकी से बुखार, गला दर्द, लीवर, मधुमेह, पीलिया, अस्थमा, कब्ज और पेटदर्द ठीक होता है। यह रक्तशोधक भी होती है।
दो जिलों की सीमा पार कर पहुंची पौड़ी जिले
सीमांत जिला चमोली के जोशीमठ से दो जिलों के पुलिस बैरियर पार कर पौड़ी जिले की सीमा में जड़ी-बूटी पहुंचना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है।
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