पौड़ी। जिला मुख्यालय में हिंदी साहित्यकार व प्रसिद्ध गढ़वाली भजन सिंह ‘सिंह’ की जयंती पर विचार गोष्ठी और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। साहित्यकारों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर हिन्दी - गढ़वाली साहित्य में उनके योगदान को याद किया। पद्मश्री डॉ. यशवंत सिंह कठौच ने कहा कि साहित्य सृजन के क्षेत्र में भजन सिंह ‘सिंह’ का योगदान अमूल्य और अविस्मरणीय है। कहा कि सरकार की ओर से वर्ष 2022 में उनके नाम पर पुरस्कार घोषित किया जाना स्वागतयोग्य कदम है। उन्होंने नई पीढ़ी से उनके साहित्य का अध्ययन करने का आह्वान किया। डॉ. कठौच ने कहा कि 29 अक्तूबर 1905 को कोट ब्लॉक के कोटसाड़ा गांव में जन्मे भजन सिंह ‘सिंह’ ने गढ़वाल राइफल्स में सेवाएं देने के साथ साहित्य सृजन भी किया। उनकी प्रमुख रचनाओं में सिंहनाद और सिंह सतसई शामिल हैं। हिंदी साहित्य में अमृतवर्षा और मां खंडकाव्य के जरिए उन्होंने सामाजिक चेतना और कुरीतियों के खिलाफ संदेश दिया। लोक गायक अनिल बिष्ट ने कहा कि उनकी रचनाओं से युवा पीढ़ी को परिचित कराना जरूरी है। इस अवसर पर केशर सिंह असवाल, मोहन सिंह रावत, अद्वैत बहुगुणा आदि मौजूद रहे।