श्रीनगर। हजार ग्राम, हजार धाम, हमरी भाषा, हमरी पच्छयाण अभियान के तहत गढ़वाली भाषा की नई विधा पजल के पजलकार जगमोहन जगमोरा एवं कुसुम जगमोरा की ओर से गढ़वाली लोक भाषा साहित्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर गढ़वाली भाषा में काम कर रहे नए रचनाकारों को सम्मानित किया गया। नगर निगम सभागार में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित के बाद सरस्वती वंदना व मां मायादेवी ग्रुप की सदस्यों के मांगल गायन के साथ हुई। इसे मौके पर प्रसिद्ध साहित्यकार डाॅ. विष्णुदत्त कुकरेती, बीना बैंजवाल, डाॅ. बेणीराम अण्थ्वाल ने गढ़वाली साहित्य की नई विधा पजल के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पजलकार जगमोहन सिंह रावत जगमोरा ने इसकी शुरुआत कर गढ़वाली साहित्य को एक नई पहचान दिलाई है। कहा, जिस प्रकार से हिंदी में पहेलियां होती हैं उसी का विस्तृत रूप पजल है, जिसमें व्यक्ति को आठ-आठ लाइन की पजल में समाहित प्रश्न का उत्तर देना होता है। उन्होंने इसे मानसिक व बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। कीर्तिनगर ब्लॉक के दूरस्थ क्षेत्र राड़ागाड़, कणोली, धौलंगी, जखंड आदि स्थानों से पंहुचे नए रचानाकार छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया गया।