जाम में फंसे गुजरात के यात्रियों ने भी अंकिता हत्याकांड के मामले में प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तराखंड सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि वह पहाड़ के इस दुख में शामिल हैं। अंकिता 18 सितंबर को लापता हुई थी। यदि 19 सितंबर को ही लोग प्रदर्शन करते, तो यह नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि यह सरकार की विफलता है। यात्रियों ने रोष जताया कि जाम लगने के बाद फंसे हुए लोगों के लिए पानी तक का इंतजाम नहीं किया गया।
नेताओं पर नहीं है भरोसा
श्रीनगर। अंकिता के परिजनों के समर्थन में उतरे लोगों का कहना था कि विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। भले ही इसमें एक-दो दिन लग जाए। उनका कहना था कि उन्हें पुलिस और प्रशासन पर भरोसा है लेकिन नेताओं पर नहीं। प्रोविजनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ है कि मरने से पूर्व अंकिता पर हथियार से वार किया गया है। दम घुटने से उसकी मौत हुई है। पुलकित का पिता अपने रसूख का इस्तेमाल कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छेड़छाड़ करवा सकता है। नेताओं के दबाव में कुछ भी हो सकता है।