देवप्रयाग में नक्षत्र वेधशाला में पांडुलिपियों का निरीक्षण करते राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के न?
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उत्तराखंड में विलुप्त हो रही पांडुलिपियों की खोज कर उन्हें संरक्षित किया जाएगा। साथ ही पांडु लिपियों को सूचीबद्ध कर उनका डिजिटलाइजेशन होगा।
प्रदेश के दौरे पर पहुंचे राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के निदेशक डा. पीएन झा ने देवप्रयाग नक्षत्र वेधशाला का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देवप्रयाग के बाद अब रुद्रप्रयाग के सतेराखाल में मिली दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण का काम शुरू किया जाएगा। बताया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन उत्तराखंड में नष्ट हो रही पांडुलिपियों की खोज कर उन्हें बचाने की मुहिम चलाएगा, जिसमें नक्षत्र वेधशाला संस्थान देवप्रयाग व पुराना दरबार टिहरी सहयोग करेगा। डा. झा ने बताया कि भारत में करीब एक करोड़ पांडुलिपियां हैं। इनमें 43.90 लाख को सूचीबद्ध किया जा चुका है। तीन लाख पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन के साथ ही 8 करोड़ 27 लाख पृष्ठों को संरक्षित किया जा चुका है। इनमें करीब 70 प्रतिशत पांडुलिपिया 22 लिपियों में संस्कृत की हैं। इस मौके पर टीम में शामिल डा. सरवरूल हक ने वेधशाला में संजोयी उर्दू पांडुलिपियों को पढ़ा। जबकि डा. कृति श्रीवास्तव ने पांडुलिपि संरक्षण की नई तकनीक व विश्वरंजन मलिक ने उनके डिजिटलाइजेशन के महत्व को बताया। इस मौके पर आचार्य भास्कर जोशी , नितिन ध्यानी, इंद्रदत्त रतूड़ी, चेतन कोटियाल, सुमिता, रवि कठैत, मौलिक जोशी, आलोक तैलंग आदि मौजूद थे।