पौड़ी की बेटी के गांव श्रीकोट में रविवार को सन्नाटा पसरा रहा। गांव में बुजुर्ग व महिलाएं ही थी। गांव के डोभ-श्रीकोट बाजार में दुकानें भी दिनभर बंद ही रही। गांव के लोग अंकिता की अंत्येष्टि में शामिल होने श्रीनगर गए थे। गांव में बुजुर्ग दादी, काकी दादी व बहनों का दिनभर रो-रोकर बुरा हाल था।
अंकिता की काकी दादी मंगली देवी ने कहा कि अंकिता के माता-पिता गरीब हैं लेकिन उन्होंने अंकिता के सपनों को उड़ान देने के लिए कभी भी गरीबी को आड़े नहीं आने दिया। कहा कि खेती व पशुपालन कर दोनों ने मेहनत से अपनी बेटी को पढ़ाया। घटना के बाद अंकिता की मां घड़ी-घड़ी बेहोश हो रही है। काकी दादी मंगली देवी ने कहा कि आरोपियों को फांसी की ही सजा मिले। आरोपियों के माता-पिता भी ऐसे ही दर्द से तड़पें जैसे हम तड़प रहे हैं। पीड़ा से कराह रहा परिवार आरोपियों का भी तमाशा देखना चाहता है। रुंधे गले से उन्होंने कहा कि जब तक जीवन रहेगा आंगन में उसकी अटखेलियां आंखों के आगे तैरती रहेगी। अंकिता की चचेरी बहन मेघना ने कहा कि अंकिता के तीनों कातिलों को कठोर सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी के पिता द्वारा बेटे को छुड़ाने के प्रयास उसके काम नहीं आने वाले हैं। क्योंकि हमारे साथ जनता व मीडिया का समर्थन है। मेघना अंकिता के साथ बिताए पलों को याद कर अपने आंसुओं को रोक नहीं पाई। दूसरी ओर ग्रामीण भुवन डोभाल ने कहा सारे ग्रामीण दुख की इस घड़ी में एकजुट होकर परिवार के साथ खड़े हैं।