- बीकेटीसी की पहल मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने किया निरीक्षण, भवन मरम्मत और छात्र संख्या बढ़ाने के दिए निर्देश
राजेश भट्ट
देवप्रयाग। लंबे समय से छात्र संख्या शून्य होने और उपेक्षा का शिकार रहे 118 वर्ष पुराने श्री रघुनाथ कीर्ति आदर्श संस्कृत महाविद्यालय को फिर से संचालित करने के लिए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने सक्रिय पहल शुरू कर दी है। बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने महाविद्यालय का निरीक्षण कर पुनर्जीवन की कार्ययोजना पर तत्काल काम शुरू करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि 2023 में भवन की जर्जर स्थिति के कारण महाविद्यालय का संचालन बंद कर दिया गया था और अध्यापकों को अन्य स्थानों पर अटैच कर दिया गया था। रांगड़ ने कहा कि उत्तराखंड की इस ऐतिहासिक धरोहर को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने छात्र संख्या बढ़ाने, भवन की मरम्मत, साफ-सफाई और रंगाई-पुताई को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। अधिशासी अभियंता विपिन तिवारी को भवन का विस्तृत सर्वे कर शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। वर्ष 1908 में स्थापित यह महाविद्यालय संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के विद्यार्थियों ने कई बार संस्कृत बोर्ड की मेरिट सूची में स्थान बनाया, जबकि वर्ष 2014 में एक छात्र प्रदेश टॉपर रहा। पूर्व शिक्षक डॉ. शैलेंद्र नारायण कोटियाल और छात्र शिवांकर देशवाल को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2018 में महाविद्यालय को विकास के उद्देश्य से बीकेटीसी को सौंपा गया था। अब समिति ने इसे दोबारा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाने का संकल्प लिया है, जिससे क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगी है।