पौड़ी। कोट ब्लॉक के बनगड़स्यूं मुछियाली के चंद्रबदनी देवी मंदिर प्रांगण में आयोजित देवीभागवत महापुराण में शक्तिस्वरूपा मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों से श्रद्धालुओं को साक्षात्कार किया गया। आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता की आरती व पूजा-अर्चना के बाद भंडारे के साथ ही महापुराण का समापन हुआ।
ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने श्रद्धालुओं को नौ दिनों के तहत माता के विविध स्वरूपों की जानकारियां दीं। कहा कि माता ही जीवआत्मा स्वरुप हैं, उनके लिए न जन्म है और न मरण। कहा कि जन्म-मरण केवल जीवों का बाह्य आवरण है, जो कि केवल देह पर लागू होते हैं।
कहा कि धर्म का वास्तविक पथ से ही मनुष्य की सामाजिक व आर्थिक उन्नति संभव है। इस मौके पर उन्होंने श्रद्धालुओं को कर्मयोग का सिद्धांत बताया। कहा कि ज्ञानी वही है, जो किसी का तिरस्कार न करे, बल्कि जीव मात्र से प्रेम व सदाचार का आचरण व व्यवहार कर पुरुषार्थ प्राप्त करें। उन्होंने लोगों से धर्म के अनुसार ही जीवन व्यतीत करने की अपील की। इस मौके पर कमला प्रसाद भट्ट, गिरीश भट्ट, दिनेश भट्ट, शास्री रमेश प्रसाद भट्ट, भाष्कर भट्ट, आचार्य और सुनील ममगाईं आदि शामिल रहे।