जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंवर सेन ने 13 वर्षीय नाबालिग के साथ हुए दुुराचार के एक मामले में पीड़िता के ताऊ और रिश्ते के चाचा को दोषी ठहराते हुए दोनों को पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दस-दस साल की सजा सुनाई है।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रेम बल्लभ पंत ने बताया कि वर्ष 2014 में लैंसडौन तहसील क्षेत्र में 13 वर्षीय बच्ची के साथ दुराचार की घटना हुई थी।
इस मामले में एक मई 2014 को पीड़िता के पिता ने राजस्व पुलिस को तहरीर देकर पीड़िता के ताऊ भगवान सिंह और रिश्ते के चाचा प्रेम सिंह पर उसके साथ दुराचार करने का आरोप लगाया था।
तहरीर में पीड़िता के पिता ने कहा था कि वह दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है। उसकी पत्नी मानसिक रूप से बीमार होने के कारण कहीं चली गई जिस पर वह अपनी 13 वर्षीय पुत्री और छोटे पुत्र को गांव में छोड़ गया। अपने बड़े भाई भगवान सिंह से इनकी देखरेख करने को कह गया था। कुछ समय बाद उसकी 13 वर्षीय बच्ची गर्भवती हो गई।
इस पर उसने अपनी बच्ची से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसके ताऊ भगवान सिंह और चचेरा चाचा प्रेम सिंह ने उसके साथ दुराचार किया। पीड़िता के पिता की तहरीर पर राजस्व पुलिस की ओर से दो मई, 2014 को पीड़ित लड़की का मेडिकल कराया जिसमें उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई थी।