गूमखाल बस हादसे में गंभीर रुप से घायल ने दून अस्पताल में दम तोड़ दिया है। उसे नौ नवंबर को कोटद्वार से अचेतावस्था में अज्ञात गंभीर घायल के रूप में दून अस्पताल के लिए रेफर किया था। परिजनों ने उसकी पहचान चौबट्टाखाल तहसील के मथणा गांव निवासी विजय मोहन सिंह नेगी (48) पुत्र स्व. कुंदन सिंह के रुप में की है।
विजय मोहन की मौत के साथ ही गूमखाल हादसे में मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। हादसे के दस और गंभीर घायलों का दून और जौलीग्रांट अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
उधर, कोतवाली पुलिस ने हादसे में मारे गए एक व्यक्ति की शिनाख्त न होने पर उसका लावारिश में अंतिम संस्कार कर दिया है। कोतवाली पुलिस की ओर से मामले के पोस्टर, फोटोग्राफ जारी करते हुए लैंसडौन थाना पुलिस को जानकारी दे दी गई है।
सोमवार को गूमखाल-सतपुली मार्ग पर बैरगांव के पास जीएमओयू की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। जिसमें सात लोगों की घटना के दिन ही मौत हो गई, जबकि 23 लोग घायल हो गए थे।
एक अज्ञात गंभीर घायल समेत 11 को जौलीग्रांट और दून अस्पताल रेफर किया गया था। अज्ञात घायल की पहचान उनके परिजनों ने देहरादून जाकर की थी।
मृतक के चचेरे भाई काशीरामपुर तल्ला कोटद्वार निवासी जगमोहन सिंह नेगी ने बताया कि विजय मोहन नेगी हादसे में गंभीर रुप से घायल था। अचेतावस्था में होने के कारण उसकी पहचान नहीं हो सकी थी। सोमवार को हुए इस हादसे में शाम को उसे दून अस्पताल रेफर किया गया था।
जहां अगले दिन मंगलवार सुबह पांच बजे उसने दम तोड़ दिया। बताया कि विजय अपने गांव में ही खेती का काम करता था। सोमवार को वह कोटद्वार से गांव जाने के लिए अभागी बस में सवार हुआ था।
कोतवाल जसवीर सिंह पुंडीर ने बताया कि एक मृतक की लगातार पांचवें दिन भी शिनाख्त नहीं हो सकी। उसका शव पोस्टमार्टम के बाद शिनाख्त के लिए यहां मोर्चरी में रखा गया था।
72 घंटे बीत जाने के बाद भी जब शिनाख्त के लिए कोई नहीं पहुंचा तो उसके फोटोग्राफ जारी कर दिए गए हैं। बीते दिन उसका यहां अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
सतपुली तहसील का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे लैंसडौन के एसडीएम सोहन सिंह सैनी का कहना है कि घटनास्थल सतपुली तहसील में पड़ता है। बैंकों का अवकाश होने के कारण सोमवार से मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।