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Pauri News: फसलों के उत्पादन में सहायक है मधुमक्खी

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श्रीनगर। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के गढ़वाल क्षेत्रीय केंद्र, श्रीनगर ने जनपद रुद्रप्रयाग के किसानों के लिए मधुमक्खी पालन पर दो दिवसीय प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया। किसानों को बताया कि मधुमक्खी पालन जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने और नकदी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संस्थान के गढ़वाल क्षेत्र निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल के निर्देशन में जनपद रुद्रप्रयाग के बरसू और ख्यारकी गांव में मधुमक्खी पालन पर दो दिवसीय प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मधुमक्खी पालन के माध्यम से सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना और इसके आर्थिक एवं पारिस्थितिक लाभों के प्रति प्रतिभागियों को जागरूक करना था। इस दौरान मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, शहद उत्पादन और परागण सेवाओं पर जागरूकता फैलाने पर विशेष ध्यान दिए जाने, जिससे कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। इस अवसर पर डॉ. कुसुम पांडे ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को पारंपरिक कृषि के साथ मधुमक्खी पालन को एकीकृत कर सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन शहद, मोम और अन्य मधुमक्खी उत्पादों के माध्यम से अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करता है, साथ ही खुबानी, सेब, आड़ू और कीवी जैसे नकदी फसलों की परागण क्षमता को बढ़ाकर उनकी उपज में भी सुधार करता है। कार्यक्रम में डॉ. के चंद्रशेखर ने कहा कि मधुमक्खी पालन जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने और नकदी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करने में सहायक है। मधुमक्खी पालन की मांग खाद्य, औषधि और सौंदर्य प्रसाधन उद्योगों में लगातार बढ़ रही है, जिससे यह एक लाभकारी और सतत आजीविका का साधन बन सकता है।
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