श्रीनगर। पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने के लिए स्थानीय बहुउद्देशीय सहकारी समिति एक अहम कदम उठाने जा रही है। समिति के निदेशक कुशलानाथ ने बताया कि किसानों को दिए जाने वाले शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण का 50 फीसदी हिस्सा केवल दुधारू पशु (गाय-भैंस) खरीदने के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सहकारिता के माध्यम से पशुपालन, मशरूम और मत्स्य पालन के लिए बिना ब्याज का कर्ज दे रही है। पहाड़ों में पशुपालन सबसे लाभकारी व्यवसाय है। दूध की बढ़ती मांग के बीच आसान ऋण मिलने से दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय, दोनों में भारी इजाफा होगा। इसके अलावा, पशुपालन की लागत कम करने के लिए सरकार साइलेज फेडरेशन के जरिये पशुपालकों को सब्सिडी पर पैक्ड साइलेज (पोषक चारा) भी मुहैया करा रही है।