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बुढिय़ा के सपने में खोये अंधविश्वासी लोग

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श्रीनगर। एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में चल रहे जश्न ए बचपन नाट्य महोत्सव मेें ‘बुढ़िया का सपना’ नाटक का मंचन किया। ललित सिंह पोखरिया द्वारा लिखित इस नाटक में बाल कलाकारों ने मंजा हुआ अभिनय कर समाज में व्याप्त अंधविश्वास को उजागर किया। बृहस्पतिवार देर शाम लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के प्रेक्षागृह मेेें नाट्य महोत्सव की दूसरी संध्या में मधुसूदन पांडेय और वीरेंद्र कुमार के निर्देशन में ‘बुढ़िया का सपना’ नाटक का मंचन हुआ। नाटक की कथावस्तु अंधविश्वास मेें जकड़ा समाज और इससे मुक्ति पर आधारित रहा। नाटक की कहानी एक गांव से शुरू होती है। इस गांव के लोग बहुत अंधविश्वासी होते हैं। इस वजह से ग्रामीण उसी गांव में रहने वाली एक बुढ़िया के जाल में फंस जाते हैं। ग्रामीण बुढ़िया को देवी समझकर हर महीने अपने घर की जमा-पूंजी उसको दे देते हैं, जिसके चलते उनके भूखे मरने की नौबत आ जाती है। कुछ समय बाद गांव के स्कूल में एक शिक्षिका आती है। वो बुढ़िया के इस सारे खेल को समझ जाती है। वह गांववालों को समझाती है कि बुढ़िया उनके अंधविश्वास का फायदा उठा रही है। शुरू में गांववाले मानने को तैयार नहीं होते हैं, लेकिन एक दिन शिक्षिका बुढ़िया के झूठ का पर्दाफाश गांववालों के सामने कर उनकी आंखें खोल देती है। इस अवसर पर केंद्र के शिक्षक डा. अजीत पंवार, डा. संजय पांडेय, कुलीन जोशी, विनय किमोठी व महेश गिरि आदि उपस्थित थे। हाईस्कूल श्रीकोट के बाल कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। इस नाटक में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय श्रीकोट गंगानाली के विद्यार्थियों ने अभिनय किया। बाल कलाकार भावना, गौरी, रूबी, ममता, सिमरन, अंजलि, दिव्या, शिवानी, विजय, तृप्ति व गोपाल के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
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