विकास खंड कीर्तिनगर के डागर, लोस्तु बडियारगढ़ और कड़ाकोट क्षेत्र में 20 अगस्त की आपदा से सिंचाई विभाग की करीब 35 से अधिक नहरें (गूल) क्षतिग्रस्त हैं। इनमें कुछ पर विभाग ने पाइप आदि जोड़कर सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था की है जबकि पूर्णरूप से क्षतिग्रस्त 15 नहरों पर पुनर्निर्माण के अलावा विभाग के पास अन्य कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में अब समय पर नहरों की मरम्मत नहीं होने से किसानों की कई हेक्टेयर खेत बरबाद हो जाएंगे।
लोस्तु बडियारढ़ क्षेत्र के पूर्व प्रधान राकेश बर्त्वाल ने बताया कि क्षेत्र में आपदा से कृषि भूमि को भारी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर 300 से 500 मीटर तक नहरें पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त है। अब बची हुई कृषि भूमि की सिंचाई करना किसानों के लिए चुनौति बन चुकी है। अगर समय पर इन नहरों (गूलों) का निर्माण नहीं किया गया तो सारी भूमि बंजर में तब्दील हो जाएगी। इस संबंध में जब विभाग से गुहार लगाई तो उन्होंने भी बजट का अभाव बताकर समस्या को टाल दिया।
-विभाग की क्षतिग्रस्त 35 नहरों में 20 पर वैकल्पिक व्यवस्था से पानी चलाया जा रहा है। शेष 15 अत्यधिक क्षतिग्रस्त नहरों (गूलों) के निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं में इस्टीमेट तैयार कर जिले और शासन को भेजे गए हैं। बजट स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। -एमएस बलूनी, सहायक अभियंता सिंचाई उप खंड कीर्तिनगर।