हल्द्वानी। अस्सी के दशक में फिल्मी गीत में पहाड़ों की खूबसूरती का जिक्र करते हुए गीतकार ने जिस बारह महीने जाड़ों के मौसम की बात की थी उस पर पर्यावरण और बदलते मौसम ने ग्रहण लगा दिया है।
अब यहां गर्मी के दिनों में तापमान सामान्य से ज्यादा पहुंच रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञ इसके लिए बड़ी संख्या में बढ़े मानवीय दखल को जिम्मेदार बता रहे हैं। नैनीताल जिले के ठंडे इलाके मुक्तेश्वर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के पार पहुंच गया है। यही हाल अन्य पर्वतीय इलाकों का भी है। नैनीताल में गर्मियों में अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री तक जाने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नदी घाटी क्षेत्र में पहले से गर्मी पड़ती थी, लेकिन अब समुद्र तल से 2000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में भी पारा बढ़ने लगा है। हिमालयी वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल वनाग्नि से राहत मिली है, नहीं तो उत्तराखंड के पहाड़ों में वनाग्नि बड़ी समस्या है। वनाग्नि भी तापमान वृदि्ध की वजह है। साथ ही पिछले कुछ साल से गर्मियों के दिनों में मानवीय दखल बढ़ा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। जिस वजह से पर्यावरण पर असर पड़ रहा है। संवाद
वनाग्नि की घटनाएं भी तापमान में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही हिमालयी क्षेत्रों में मानवीय दखल भी बढ़ी है। -डॉ. जेसी कुनियाल, हिमालयी वैज्ञानिक, जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा।
तापमान में उछाल आता है इसका कारण ग्लोबल वार्मिंग, चक्रवात समेत अन्य हैं। इसलिए पहाड़ों में तापमान में गिरावट और उछाल आ रहा है। -विक्रम सिंह, निदेशक, राज्य मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून।