रामनगर (नैनीताल)। वन्यजीवों से इंसानों, फसलों, मवेशियों की सुरक्षा की मांग के लेकर ग्रामीणों ने कॉर्बेट कार्यालय पर धरना देकर प्रदर्शन किया। उन्होंने वन्यजीवों के हमलों में मरने वालों के आश्रितों को 25 लाख रुपये मुआवजा और घायलों के संपूर्ण इलाज की गारंटी और 10 लाख रुपये मुआवजा आदि की मांग उठाई। वहीं आक्रोशित ग्रामीणों ने 31 दिसंबर को कॉर्बेट नेशनल पार्क का ढेला झिरना रेंज बंद कर पर्यटकों की आवाजाही ठप करने की चेतावनी दी।
मांगों को लेकर ग्रामीणों ने कार्बेट टाइगर रिजर्व कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। उन्होंने भीमताल क्षेत्र में बाघ की दहशत से मुक्ति को लेकर चल रहे आंदोलन का समर्थन किया। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक के नहीं मिलने पर उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
यहां हुई सभा में संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों को जंगली जानवरों के पास मरने के लिए छोड़ दिया है। उत्तराखंड में लोग मर रहे हैं और डर के साए में जीने को मजबूर हैं। कहा कि बाघ, तेंदुए, जंगली सुअर आदि अब विलुप्त प्रजाति नहीं रह गए हैं, ये गांव-गांव और घर-घर घूम रहे हैं। अब सरकार को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1973 में परिवर्तन कर इन जानवरों को संरक्षित प्रजाति से बाहर करना चाहिए तभी उत्तराखंड के लोगों की जान बच सकती है।
इस मौके पर रमूली देवी, सुमित, ललित पांडे, सोवन तड़ियाल, सूरज, गोविंद अधिकारी, ललिता रावत, धनवंतरी गिरी, चंपा जोशी, मुन्नी बुधनी, अनीता गुसाई, आशा देवी, ख्याली दत्त डोर्बी, चिंताराम, संजय मेहता, रोहित रहेला आदि रहे।