हाईकोर्ट के आदेश के बाद विजिलेंस वन निगम के अधिकारियों से जुड़ी जांच कर रही है। इसमें विजिलेंस ने वन निगम के आरएम और डीएलएम से कई जानकारियां मांगी गई हैं।
नंधौर-हल्द्वानी उज्ज्वल धर्मकांटा ऑनर सोसायटी, आंचल धर्मकांटा ऑनर सोसायटी और हल्द्वानी-लालकुआं धर्मकांटा ऑनर वेलफेयर सोसायटी ने निविदा की शर्तों को याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि निविदा सूचना नियमावली के विरुद्ध है। अक्तूबर में हाईकोर्ट ने उत्तराखंड वन विकास निगम के इसी वर्ष जुलाई-अगस्त में कोसी, गौला व दाबका के खनन गेटों के लिए धर्मकांटे लगाने के सभी टेंडर निरस्त कर दिए है।
कोर्ट ने इस मामले में वन निगम के तत्कालीन एमडी सहित अन्य अधिकारियों के आचरण की सतर्कता विभाग से जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद विजिलेंस ने जांच को शुरू किया है। इसमें विजिलेंस ने वन निगम के आरएम और डीएलएम से भी जानकारी मांगी है। सूत्रों के मुताबिक इसमें विजिलेंस ने अधिकारियों से पूछा है कि कांटों को लेकर शर्ताें को किसने बनाया, इसमें टेंडर कहां से जारी किए गए। इसके अलावा कई कागजों से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। वन निगम कार्यालय से कई अभिलेख भी लिए गए हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
एसपी विजिलेंस धीरेंद्र गुंज्याल कहते हैं कि वन निगम के अफसरों आचरण को लेकर जांच की जा रही है। वन निगम एमडी एसएस सुबुद्धि का कहना है कि जो अभिलेख मांगे गए थे वे सौंप दिए गए हैं। वन निगम के आरएम महेश आर्य कहते हैं कि जो विजिलेंस अधिकारियों को बताया गया था कि उनके या मंडल स्तर से शर्ताें को तय नहीं किया जाता है। इसके अलावा टेंडर की भी कार्रवाई नहीं की गई है।