वसंत पंचमी पर्व उत्साह पूर्वक मनाया गया। घर-घर में पकवान बनाकर वसंत के प्रतीक पीले रुमाल सिर पर रखकर सभी परिजनों के सिर पर जौ शिरोधारण कराया गया और उनके दीर्घ जीवन की कामना की गई।
वसंत पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इसे पवित्र और श्रृंगार रस से भरपूर ऋतु मानते हुए सभी इसका आदर करते हैं। इसे ऋतुराज भी कहा जाता है।
वसंत पंचमी पर कई स्थानों पर बैठकी होली का आयोजन भी किया गया। होली गीतों की शुरुआत ‘आयो नवल वसंत, सखी ऋतुराज कहायो’ से हुई।