उत्तराखंड हाईकोर्ट ने क्लॉक टावर ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के बीच चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस बीएस चौहान को औपचारिक रूप से प्रिसाइडिंग आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। कोर्ट ने मामले में अब तक हुई मध्यस्थता की कार्यवाही को भी परिस्थितियों को देखते हुए नियमित कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता एवं न्याय मूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि आवेदक की ओर से 27 सितंबर 2024 के पूर्व नियुक्ति आदेश को वैध घोषित करने की मांग पर विचार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अपने ही पूर्व आदेश की वैधता पर निर्णय नहीं देगा। मामला हाईकोर्ट के पूर्व आदेश से संबंधित है, जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बयानों के आधार पर विवाद के समाधान के लिए जस्टिस बीएस चौहान को मध्यस्थ नियुक्त किया गया था। आदेश में मध्यस्थता का स्थान देहरादून निर्धारित किया गया था। आदेश के बाद जस्टिस चौहान ने 7 अक्टूबर 2024 को संबंधित पक्षों और ट्रिब्यूनल के अन्य सदस्यों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई थी। हालांकि, यह जानकारी उस समय गलती से हाईकोर्ट को नहीं भेजी जा सकी और बाद में मार्च 2025 में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई।
ट्रिब्यूनल के गठन पर उठी थी आपत्ति, प्रतिवादी ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल का औपचारिक रूप से गठन नहीं हुआ था। इसलिए अब तक हुई कार्यवाही को समाप्त किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर ट्रिब्यूनल के सदस्यों के बीच भी मतभेद सामने आए।
प्रिसाइडिंग आर्बिट्रेटर और सह-मध्यस्थ जस्टिस मुक्ता गुप्ता का मत था कि ट्रिब्यूनल की क्षमता से संबंधित आपत्ति पर निर्णय लेने का अधिकार हाईकोर्ट को है। वहीं तीसरे सदस्य जस्टिस आरएन मिश्रा ने माना कि आवश्यक जानकारी प्रस्तुत किए जाने के बावजूद हाईकोर्ट के औपचारिक आदेश के बिना ट्रिब्यूनल का गठन पूर्ण नहीं हुआ था और प्रारंभिक कार्यवाही अमान्य थी।
मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने अब जस्टिस बीएस चौहान को प्रिसाइडिंग आर्बिट्रेटर नियुक्त करते हुए पूर्व में हुई कार्यवाही को नियमित कर दिया। साथ ही, प्रतिवादी को अतिरिक्त लिखित बयान दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान किया गया।