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Uttarakhand: पत्नी के भरण-पोषण में बढ़ोतरी, हाईकोर्ट ने 9000 की जगह 14 हजार रुपये मासिक देने का दिया आदेश

Tue, 04 Aug 2026 09:56 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक पत्नी के मासिक भरण-पोषण में वृद्धि करते हुए इसे नौ हजार रुपये से बढ़ाकर 14 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने सुनाया।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पत्नी को दिए जा रहे मासिक भरण-पोषण में वृद्धि करते हुए इसे 9,000 से बढ़ाकर 14,000 प्रतिमाह कर दिया है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी मीनाक्षी जोशी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसके पति वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड हैं और उनका शुद्ध मासिक वेतन लगभग 48,615 है। याचिका में कहा कि उनकी माता पेंशन प्राप्त करती हैं और आर्थिक रूप से उन पर निर्भर नहीं हैं। पत्नी ने यह भी बताया कि वह स्लिप डिस्क की बीमारी से पीड़ित हैं तथा नियमित फिजियोथेरेपी और उपचार पर हर माह काफी खर्च करना पड़ता है। वहीं, पति की ओर से कहा गया कि वह बेटी की शिक्षा, ट्यूशन, परिवहन, ऋण की किस्तों और बीमा प्रीमियम का भुगतान कर रहे हैं, इसलिए भरण-पोषण बढ़ाने का कोई आधार नहीं बनता है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को सम्मान पूर्वक जीवनयापन के लिए यथोचित भरण-पोषण मिलना चाहिए। अदालत ने माना कि पति की आय, पत्नी की चिकित्सा आवश्यकताओं और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए 9,000 की राशि पर्याप्त नहीं है। इसलिए इसे बढ़ाकर 14,000 प्रतिमाह किया गया। कोर्ट ने कहा कि यह बढ़ी हुई राशि अगस्त 2026 से देय होगी और प्रत्येक माह की 10 तारीख तक अदा करनी होगी।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि पति लगातार दो माह तक भरण-पोषण राशि का भुगतान नहीं करता है तो पत्नी कानून के अनुसार निष्पादन की कार्यवाही शुरू कर सकती है। साथ ही, वह संबंधित विभाग से वेतन से सीधे कटौती कर भरण-पोषण राशि दिलाने का अनुरोध भी कर सकती है।

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