हल्द्वानी। श्राद्ध पक्ष शनिवार को पूर्णिमा तिथि के साथ शुरू होगा। इसके बाद 27 सितंबर से महालया श्राद्ध का क्रम शुरू होगा। पितृपक्ष में पूर्णिमा से पितृ विसर्जन अमावस्या तक तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान आदि किए जाएंगे। 10 अक्तूबर को सर्वकार्यार्थ पितृ विसर्जन की अमावस्या होगी। ज्योतिष डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्या राशि में सूर्य के गोचर के दौरान कृष्ण पक्ष में पार्वण श्राद्ध किए जाते हैं। ज्योतिष अशोक वार्ष्णेय ने बताया 26 सितंबर को पूर्णिमा और 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध होगा। ज्योतिषाचार्या डॉ. मंजु जोशी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार पार्वण श्राद्ध में ब्राह्मण और गाय को भोजन कराने के साथ कौवा, स्वान (कुत्ता) और चींटी आदि के लिए भी अन्न निकालने की परंपरा है। भोजन का पहला निवाला कौवे के लिए निकालने और तिथि के अनुसार तर्पण व पिंडदान करने की परंपरा है।