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क्वारब की पहाड़ी और कैंची के जाम से निपटने में सरकार कतई गंभीर नहीं : हरीश

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हल्द्वानी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि क्वारब में लगातार दरकने वाली पहाड़ी और कैंची धाम और इसके आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले जाम से कुमाऊं के पर्वतीय जिलों में न केवल कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं बल्कि वहां के लोग भी खासे परेशान हैं। इसके बाद भी राज्य सरकार न तो इन मामलों का ठोस हल निकाल रही है और न ही सुझाए गए उपायों पर अमल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित से जुड़े मुद्दों पर जरा भी गंभीर नहीं है।अमर उजाला से बातचीत में रावत ने कहा कि मानसून सीजन के दौरान क्वारब में आए दिन पहाड़ी दरकती हैं। पत्थर और बोल्डर गिरते हैं जिससे यातायात बाधित होता है और जानमाल का खतरा बना रहता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने काफी समय पहले सरकार को सुझाव दिया था कि वह क्वारब की पहाड़ी में ऊपर की ओर भार कम करने के साथ-साथ स्लोप में पाइपों के माध्यम से पानी की निकासी कराएं। यह एक सामान्य ट्रीटमेंट था लेकिन सरकार ने उनके सुझाव पर अमल नहीं किया।कहा कि कैंची और इसके आसपास लगने वाले जाम से भी छुटकारा पाने के लिए सरकार के पास दो विकल्प हैं। पहला हल्द्वानी-कालाढूंगी-कोटाबाग-आमगड़ी-बेतालघाट-खैरना रोड है जिसे कुछ हद तक चौड़ा किया जाना है। ऐसा हो तो तीन जिलों का यातायात सुचारू हो सकता है। इसमें भी अधिकतम छह माह का समय लगेगा। दूसरा भवाली-रामगढ़-मौना होकर बमस्वार होते हुए वाहनों की आवाजाही कराई जाए। इससे अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ आने जाने वाले वाहन जाम से बच जाएंगे। कहा कि सरकार कुछ भी करने को तैयार नहीं है। कहा कि सरकार और प्रशासन कैंची बाइपास के कागजी घोड़े दौड़ा रहा है।
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