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अदृश्य अपराध भाग-1: पहला घंटा डिजिटल जांच का गोल्डन टाइम, 1930 पर की गई कॉल तय कर सकती है रकम की अगली मंजिल

Tue, 22 Sep 2026 11:54 AM IST
गायत्री जोशी समीर बिसारिया

सार

साइबर ठगी का पता चलते ही की गई त्वरित कार्रवाई रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मदद कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार ठगी के बाद पहला घंटा जांच और रकम की रोकथाम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
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विस्तार
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साइबर ठगी में नुकसान सिर्फ खाते से निकलने वाली रकम का नहीं होता। असली नुकसान उस समय शुरू होता है, जब पीड़ित ठगी का पता चलने के बाद भी कुछ देर तक यह तय नहीं कर पाता कि अब क्या किया जाए। यही देरी ठगों को रकम आगे बढ़ाने और डिजिटल निशान धुंधले करने का मौका दे देती है, इसलिए ठगी के बाद का पहला घंटा जांच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लिहाजा ठगी का पता चलते ही सबसे पहले 1930 पर कॉल करनी चाहिए। शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होगी, उतनी जल्दी संबंधित तंत्र तक लेनदेन की सूचना पहुंचाने और रकम को आगे जाने से रोकने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसलिए पहला घंटा सिर्फ रकम बचाने का समय नहीं बल्कि उस डिजिटल रास्ते को सुरक्षित रखने का समय भी है, जिस पर चलते हुए जांच ठगों तक पहुंच सकती है।

32 लाख शिकायतों के बाद बचाई 11,158 करोड़ की राशि

भारत सरकार के आईफोरसी (I4C) के अनुसार, सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग और मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) के माध्यम से 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई जा चुकी थी।

10 मिनट में बदल सकती है रकम की मंजिल

साइबर ठगी में रकम अक्सर एक ही खाते में नहीं रहती। वह अलग-अलग खातों और डिजिटल माध्यमों के जरिये आगे बढ़ सकती है। इनमें ऐसे म्यूल खाते भी शामिल होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराध की रकम को घुमाने के लिए किया जाता है। जारी आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक आईफोरसी के सिस्टम में 32.08 लाख लेयर-एक म्यूल खातों से जुड़ा डेटा साझा किया जा चुका था। यानी रकम जितनी तेजी से आगे बढ़ती है, उसकी शुरुआती रोकथाम के लिए समय उतना ही कम होता है।

बड़ी डिजिटल कड़ी तोड़ सकती है छोटी चूक

पीड़ित को ठगी के बाद चैट, कॉल डिटेल, संदिग्ध नंबर, वेबसाइट या लिंक, स्क्रीनशॉट और भुगतान से जुड़े संदेश सुरक्षित रखने चाहिए। शिकायत दर्ज करते समय बैंक या वॉलेट का नाम, ठगी की रकम, तारीख और 12 अंकों का ट्रांजेक्शन आईडी/यूटीआर नंबर जैसी जानकारी मांगी जाती है। सिर्फ शिकायत करना ही पर्याप्त नहीं है। घटना का समय और घटनाक्रम सही-सही दर्ज करना भी जांच के लिए बेहद जरूरी है।

आपकी बिना अनुमति के अगर खाते से रकम निकलती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती एक घंटे में शिकायत मिलने पर तुरंत राशि फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। - एसपी मनोज कुमार कत्याल, साइबर एक्सपर्ट

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