नैनीताल। हाइकोर्ट में प्रदेश की जेलों में सीसीटीवी कैमरे, रहने की व्यवस्था सहित अन्य सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश की जेलों में सात साल से कम सजा वाले 740 कैदी हैं। इनमें से 25 की जमानत हो गई है और आठ कैदी ऐसे हैं जिनको जमानत तो मिली है लेकिन जमानती न मिलने से वे जेल में ही हैं। हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में सत्येंद्र कुमार मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर कार्यवाही करने के निर्देश निचली अदालतों को दिए हैं ।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। संतोष उपाध्याय व अन्य ने हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में एक आदेश जारी कर सभी राज्यों से कहा गया था कि वे अपने राज्य की जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाएं और जेलों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं। राज्य में मानवाधिकार आयोग के खाली पड़े पदों को भरने के आदेश जारी किए गए थे लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी निर्देश का पालन करे और जेलों में भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए।