रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड में कई कथाएं हैं, जिनका चित्रण होना चाहिए ताकि देश और दुनिया उत्तराखंड के महत्व की जानकारी हो सके। यहां के गीत, उत्पाद को प्रचारित करने पर प्रदेश सरकार की ओर से सब्सिडी दी है। यह प्रदेश सरकार की नई फिल्म पॉलिसी के तहत होगा। यह बात पर्यटन, संस्कृति और सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कही।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से आयोजित भारत रंग महोत्सव के शुभारंभ पर मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि भारत की संस्कृति कंधार से लेकर कंबोडिया तक फैली है। उत्तराखंड में दुष्यंत, शकुंतला का कर्ण आश्रम रहा है, जो कोटद्वार के करीब मानिली नदी के पास है। यहीं पर भरत का जन्म हुआ था, जिनके नाम पर भारत का नाम है।
इसके अतिरिक्त पंडित नैन सिंह रावत ने यहां से लासा की दूरी नापी थी जिनको अंग्रेजों ने घोड़ा देकर दूरी नापने को कहा था, लेकिन उन्होंने पैदल चलकर दो फीट की रस्सी बांधकर फिजिकली लासा की दूरी को नापा था। उन्हें पंडित की उपाधि दी गई थी।
हाल ही में गूगल ने उन पर डूडल बनाया था। रामनगर के बारे में उन्होंने कहा कि यहां पेरिस से महंगी जमीन है। यहां पर डेस्टिनेशन वेडिंग का प्वाइंट बन रहा है।
नाटक को प्रमोट करना चाहिए : संजय मिश्रा
फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा ने बताया कि वह लोनावाला में थे तब मुझे यहां से चंदन बिष्ट का फोन आया और मुझे यहां आने के लिए कहा। मैं यहां आने लिए तैयार हो गया। एनएसडी की ओर से ई मेल पर मुझे यहां चीफ गेस्ट बनकर आने को कहा गया। मेरा उत्तराखंड से काफी लगाव है। नाटक में सबकुछ हाेता है और सरकार को इसे प्रमोट करना चाहिए। वहीं जनता को भी नाटक देखने आना चाहिए, ताकि कलाकारों का उत्साहवर्धन हो सके।
थिएटर फेस्टिवल में तानी ला तान्यो नाटक ने मनमोहा
रामनगर। रामनगर के पंडित एनडी तिवारी हॉल में उद्घाटन समारोह में रिकेन एनगोमले की ओर से निर्देशित तानी ला तान्यो नाटक ने मनमोह लिया। तान्यो बाघ के बारे में अरुणाचल प्रदेश की लोककथाओं पर आधारित यह नाटक, बूढ़े तानी के अपने बड़े भाई तान्यो की बाघ के रूप में पहचान को हमेशा के लिए गुप्त रखने के वादे के इर्दगिर्द घूमता है। तानी जनजाति की मौखिक परंपरा में, पूर्वजों को उनके नाम पढ़कर याद किया जाता है और तानी अपने भाई तान्यो को याद रखना चाहता है। जैसे ही तानी मौत के करीब पहुंचता है, वह अपने परिवार को बताता है कि तान्यो एक बाघ है जो अभी भी पहाड़ों के पार रहता है और समुदाय का मानना है कि बाघ उनका बड़ा भाई है। यह नाटक आधुनिक समाज में अदृश्य देवताओं पर संघर्ष के विपरीत, सामुदायिक जीवन, मनुष्य और प्रकृति के बीच आपसी सद्भाव व दृश्य प्रकृति की ओर से दिए गए आशीर्वाद के लिए कृतज्ञता के विषयों की पड़ताल करता है।