हल्द्वानी। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने यहां प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित कर राज्य आंदोलन में शहीद हुए लोगों की भावनाओं के मुताबिक राज्य का निर्माण न होने पर गहरी चिंता जताई। कहा कि सरकारों की गलत नीतियों के कारण अलग राज्य बनने के बाद भी उत्तराखंड से पलायन जारी है। अलग राज्य बनने के बाद भी न तो सरकारें रोजगार जुटा पाई और न ही आम लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा सकी है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने का मुद्दा आज भी जस का तस है।
यहां कमलुवागांजा रोड स्थित एक बैंक्वेट हाल में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने राज्य की दिशा और दशा पर मंथन किया। कहा कि सरकारों की गलत नीतियों के कारण उत्तराखंड के लोग आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आंदोलनकारियों की मांगों को जायज बताते हुए विधानसभा सत्र में उठाने का आश्वासन दिया। सम्मेलन में गैरसैण को स्थाई राजधानी घोषित कराने, उत्तराखंड में मजबूत भू कानून लागू करने, राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरियों में दस फीसदी क्षैतिक आरक्षण देने, चिह्निकरण से वंचित आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारियों की सूची में दर्ज करने, राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन बढ़ाने, आंदोलनकारियों को राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा देने, उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने, सरकारी गेस्ट हाउसों में निशुल्क कमरे उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पारित किए गए।
सम्मेलन को पूर्व सांसद महेंद्र सिंह पाल, विधायक सुमित हृदयेश, मंडी परिषद अध्यक्ष डॉ. अनिल कपूर डब्बू, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट व गजराज बिष्ट ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में प्रदेश भर से पहुंचे राज्य आंदोलनकारियों का समिति अध्यक्ष भुवन जोशी, सदस्य प्रभात ध्यानी, प्रवक्ता डॉ. केदार पलड़िया ने स्वागत किया। सम्मेलन में राज्य आंदोलनकारी हुकुम सिंह कुंवर, डाॅ. बालम सिंह बिष्ट, हेमंत सिंह बगड़वाल, ललित जोशी, मोहन पाठक, खड़क सिंह बगड़वाल, बृजमोहन सिजवाली, अवतार सिंह बिष्ट, राजेंद्र खनवाल, हरीश पनेरू आदि मौजूद रहे।