हल्द्वानी। काठगोदाम पुल की हालत खराब है। पुल के ऊपर की तरफ रेलिंग के पास बनी दीवार पर सरिया झांकने लगी है, जबकि नीचे की तरफ खंभे में नदी के पानी से बुनियाद में कटाव हो रहा है। पानी बुनियाद की तरफ से निकल रहा है। यही नहीं सुरक्षा रेलिंग के भी गिरने का खतरा बना हुआ है।
गौलापार जाने के लिए गौला नदी पर दो पुल बने हैं। इनमें काठगोदाम पुल का निर्माण 1975 में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने किया था। इसके बीच के खंभे पर नदी के बहाव का सबसे ज्यादा असर पड़ता है। इस खंभे की बुनियाद आदि की सुरक्षा के लिए चारों तरफ से एप्रेन बनाया गया था, लेकिन एक तरफ से इसमें कटाव हो रहा है। बुनियाद के पास से ही नदी का पानी बह रहा है।
काठगोदाम पुल के ऊपर की स्थिति भी ठीक नहीं है। पुल के दोनों सिरे की तरफ रेलिंग से लगती दीवार बनी है। इसमें सरिया दिखने लगी है। रेलिंग की भी हालत खराब है। इसके अलावा लगातार हाॅटमिक्स होने से पुल की रेलिंग की ऊंचाई कम हुई है। खासकर सर्किट हाउस की तरफ से आने से रेलिंग केवल ढाई फीट तक रह गई है। ऐसे में गिरने का खतरा बना हुआ है। यह पुल गौलापार बाइपास पर जाने के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ ही हैड़ाखान रोड के गांवाें के लोग भी यहीं से आवाजाही करते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
- कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत का कहना है कि अगर पुल में कोई दिक्कत है जिससे कोई बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसे में संबंधित विभाग को तत्काल सर्वे कर आपदा प्रबंधन कोष से धनराशि लेकर मरम्मत कार्य शुरू करानी चाहिए। पुल का निरीक्षण किया जाएगा।
इधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि संबंधित पुल और मार्ग को एनएचएआई को हस्तांतरित हो चुका है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक योगेंद्र शर्मा का कहना है कि पुल का सर्वे कराया जा चुका है, पुल के स्ट्रक्चर से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। पुल पूरी तरह सुरक्षित है। विभागीय कार्य के लिए एजेंसी तय हो गई है। कार्य शुरू होने के साथ ही जो भी कमियां दिखाई दे रही हैं, उन्हें ठीक करा लिया जाएगा।